केदारनाथ VIP बिल विवाद में बड़ा खुलासा, जांच में मिली वित्तीय अनियमितताएं, शासन ने दोषियों पर कार्रवाई के दिए सख्त निर्देश

केदारनाथ धाम में वीआईपी मेहमानों पर मंदिर कोष से खर्च किए जाने के मामले में जांच समिति ने वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की है। उत्तराखंड शासन ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

देहरादून। केदारनाथ धाम में विशिष्ट अतिथियों के ठहरने और भोजन से जुड़े खर्च मंदिर कोष से किए जाने के विवाद में महत्वपूर्ण मोड़ आया है। बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि की है। रिपोर्ट सामने आने के बाद उत्तराखंड शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला उस समय चर्चा में आया था, जब सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए प्राप्त दस्तावेज सार्वजनिक हुए। इन दस्तावेजों में आरोप लगाया गया कि कुछ वीआईपी मेहमानों के आवास और खानपान का भुगतान मंदिर समिति के कोष से किया गया, जबकि यह राशि श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से संबंधित थी।

दस्तावेजों में भाजपा प्रदेश सचिव नेहा जोशी के नाम पर करीब 60 हजार रुपये तथा केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल के नाम पर 37 हजार रुपये से अधिक के खर्च का उल्लेख होने का दावा किया गया था। हालांकि, दोनों नेताओं ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने निजी खर्च का भुगतान स्वयं किया है। दूसरी ओर विपक्ष ने इस पूरे मामले को आस्था से जुड़े धन के दुरुपयोग का मामला बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे।

विवाद बढ़ने के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति की रिपोर्ट में पाया गया कि विशिष्ट अतिथियों से जुड़े आवास और भोजन के बिलों का भुगतान मंदिर समिति के माध्यम से किया गया तथा इस प्रक्रिया में निर्धारित वित्तीय नियमों का समुचित पालन नहीं किया गया।

जांच रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड शासन ने भी अपनी सख्त टिप्पणी दर्ज की है। 25 जून 2026 को उप सचिव अनिल कुमार पांडे द्वारा बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया कि सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना मंदिर कोष से अग्रिम राशि जारी किया जाना वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।

शासन ने इस मामले में तत्कालीन व्यवस्थापक (केदारनाथ), तत्कालीन मुख्य प्रभारी अधिकारी (केदारनाथ) तथा तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी (बीकेटीसी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इन अधिकारियों के विरुद्ध बीकेटीसी अधिनियम, 1939 के प्रावधानों के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले के सामने आने के बाद धार्मिक संगठनों और आम श्रद्धालुओं में भी नाराजगी देखी जा रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि शासन के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में मंदिर कोष के उपयोग को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता दोबारा न हो।

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