बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामले में गोदियाल का बड़ा हमला, बीकेटीसी अध्यक्ष को दी सीधी चुनौती!

खाली कुर्सी रखकर बोले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष- “हेमंत द्विवेदी सामने आएं, चर्चा करें”, न्यायिक जांच की उठाई मांग

देहरादून। बदरीनाथ धाम में सामने आए कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर राज्य सरकार और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए।

गौरतलब है कि 2 जुलाई 2026 को बदरीनाथ धाम में दान पात्रों की राशि की गिनती के दौरान गड़बड़ी सामने आई थी। इस दौरान मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह गिनती के दौरान नोटों की गड्डियां अपने मोबाइल के नीचे और जेब में छिपाते नजर आया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखी गई। पुलिस ने 13 जुलाई की रात आरोपी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार कर लिया।

उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें बहस की चुनौती दी थी। कांग्रेस ने इस चुनौती को पूरी गंभीरता से स्वीकार किया और आज निर्धारित समय पर दोपहर 12:30 बजे प्रेस क्लब पहुँचकर तथ्यों के साथ अपनी बात रखने के लिए उपस्थित रही। लेकिन चुनौती देने वाले स्वयं नहीं पहुँचे। यह स्पष्ट करता है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य नहीं थे।

गणेश गोदियाल ने कहा कि जो व्यक्ति सार्वजनिक रूप से बहस की चुनौती देता है और फिर निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होता, वह स्वयं अपनी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा देता है। इससे यही संदेश जाता है कि सच्चाई का सामना करने का साहस उनके पास नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा और बीकेटीसी के पदाधिकारी जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रमोद नौटियाल वर्ष 2003 में बीकेटीसी में नियुक्त हुआ था। वर्ष 2010 में भाजपा सरकार में उसके नियमितीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया और वर्ष 2014 में शासन द्वारा उसकी स्वीकृति दी गई। उस समय वह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और नियमितीकरण का निर्णय शासन स्तर पर लिया गया था।

गणेश गोदियाल ने कहा कि वास्तविक प्रश्न यह नहीं है कि प्रमोद नौटियाल की नियुक्ति कब हुई या उसका नियमितीकरण कब हुआ। असली सवाल यह है कि बदरीनाथ धाम में दानराशि की कथित चोरी आखिर किसके कार्यकाल में हुई? यदि आज मंदिर की दानराशि की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, सीसीटीवी फुटेज में नोटों की गड्डियों के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं और मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं, तो इसकी जवाबदेही वर्तमान प्रबंधन और वर्तमान सरकार की बनती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा की पुरानी कार्यशैली रही है कि जब भी उसके शासनकाल में कोई गंभीर मामला सामने आता है, वह अपने दायित्व से बचने के लिए कांग्रेस के नेताओं को अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटने का प्रयास करती है। लेकिन इस बार भी जनता तथ्यों को देख रही है और समझ रही है कि वास्तविक जवाबदेही किसकी है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस न तो किसी तथ्य से भागती है और न ही किसी बहस से। यदि बीकेटीसी अध्यक्ष में साहस है तो वे किसी भी सार्वजनिक मंच पर आकर तथ्यों के आधार पर चर्चा करें। कांग्रेस हर प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार है, लेकिन भाजपा को भी अपने कार्यकाल में हुई घटनाओं का जवाब जनता को देना होगा।गोदियाल ने कहा कि 9 वर्ष भाजपा की पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत की सरकार है यदि उनके(गोदियाल के) कार्यकाल में कुछ गलत हुआ तो आज तक एक्शन क्यों नहीं लिया गया?

उन्होंने दोहराया कि देवभूमि की आस्था सर्वोपरि है। मंदिरों की दानराशि, व्यवस्था और श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना सरकार और मंदिर समिति की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। इस मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई होनी चाहिए और पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।उन्होंने बीकेटीसी की आंतरिक जांच समिति पर भी सवाल उठाते हुए इसे खारिज किया और मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी सेवारत न्यायाधीश की निगरानी में या विधानसभा की संयुक्त समिति से कराने की मांग की।

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