

देर रात प्रशासन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई नोकझोंक के बाद बदला कार्यक्रम स्थल, डीएम का दावा- फैसला पूरी तरह प्रशासनिक, किसी राजनीतिक दल को रोकने से कोई लेना-देना नहीं
देहरादून। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम “छात्रों की गूंज” को लेकर देहरादून में सियासी पारा चढ़ गया है। मंगलवार देर रात परेड ग्राउंड में पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हल्की झड़प के बाद पार्टी ने कार्यक्रम की जगह बदलने का निर्णय ले लिया है। अब 17 जुलाई को यह आयोजन परेड ग्राउंड के बजाय बन्नू स्कूल मैदान में संपन्न होगा।
दरअसल जिलाधिकारी की तरफ से परेड ग्राउंड में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी गई थी, इसके बावजूद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में बड़ी तादाद में नेता और कार्यकर्ता पार्टी मुख्यालय से परेड ग्राउंड की ओर कूच कर गए। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच थोड़ी देर के लिए तीखी बहस भी देखने को मिली। मैदान के बाहर कांग्रेसियों ने धरना देकर राज्य सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। इस दौरान पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह और सह प्रभारी मनोज यादव सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
धरने में बोलते हुए गणेश गोदियाल ने सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस मैदान को सरकारी आयोजन का हवाला देकर कांग्रेस को नहीं दिया गया, वहां उस वक्त कोई गतिविधि चल ही नहीं रही थी। उनका यह भी दावा रहा कि पार्टी ने निर्धारित 65 हजार रुपए शुल्क से कहीं अधिक, यानी 1.77 लाख रुपए जमा करा दिए थे, बावजूद इसके अनुमति नहीं मिली। गोदियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा राहुल गांधी के इस आयोजन से भयभीत है और सिर्फ नाम सुनकर ही सरकार बैकफुट पर आ गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन और कांग्रेस के बीच बढ़ते टकराव का खामियाजा छात्रों और उनके अभिभावकों को न भुगतना पड़े, इसलिए स्थल परिवर्तन का निर्णय लिया गया ताकि हर छात्र सुरक्षित माहौल में कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे और बिना किसी दिक्कत के अपने घर लौट सके।
वहीं दूसरी ओर जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विशुद्ध प्रशासनिक फैसला बताया। उनके अनुसार कांग्रेस ने प्रारंभ में परेड ग्राउंड के लिए ही आवेदन किया था, मगर वहां पहले से लोक संवर्धन पर्व का आयोजन चल रहा है, जिसकी अवधि भारत सरकार द्वारा आगे बढ़ाई जा चुकी है। स्थल की उपलब्धता, यातायात व्यवस्था, कानून-व्यवस्था और आम जनता की सुविधा जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस को बन्नू स्कूल मैदान समेत कुछ अन्य विकल्प सुझाए गए थे। जिलाधिकारी ने साफ किया कि इस फैसले का किसी भी राजनीतिक दल के कार्यक्रम को बाधित करने से कोई सरोकार नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी पलटवार किया। उनका कहना था कि नगर निगम को राहुल गांधी के कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी गई थी और अगर कांग्रेस नेता वास्तव में छात्रों से सीधा संवाद करना चाहते हैं तो आयोजन को लेकर इतना हंगामा खड़ा करने की जरूरत नहीं थी।
उधर परेड ग्राउंड के बाहर राहुल गांधी के कार्यक्रम से संबंधित सामान लादे कई ट्रक भी खड़े नजर आए, जो आयोजन की तैयारियों में जुटी टीम की सक्रियता को दर्शाते हैं। जानकारी के अनुसार राहुल गांधी की 7 से 8 सदस्यीय कोर टीम पहले ही देहरादून पहुंच चुकी है, वहीं मंच व अन्य जरूरी सामान करीब 48 घंटे पहले ही दिल्ली से रवाना कर दिया गया था। पार्टी सूत्रों का दावा है कि यह पारंपरिक राजनीतिक सभा नहीं होगी, बल्कि मंच पर राहुल गांधी के अतिरिक्त कोई अन्य राजनीतिक चेहरा नजर नहीं आएगा। इस दौरान छात्र शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक, बेरोजगारी और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सीधे सवाल पूछ सकेंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले जून के पहले सप्ताह में भी राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित था, जिसमें अल्मोड़ा में जनसभा और पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन शामिल था, लेकिन खराब मौसम के चलते उनका हेलिकॉप्टर पंतनगर से आगे उड़ान ही नहीं भर सका और उन्हें वहीं से दिल्ली लौटना पड़ा था। उस दौरान उन्होंने फोन और वर्चुअल माध्यम से ही लोगों को संबोधित किया था। इसी अनुभव के चलते कांग्रेस इस बार दौरे को हर हाल में सफल बनाने की कोशिश में जुटी है। फिलहाल सारा दारोमदार इस बात पर टिका है कि पार्टी शाम तक सिटी मजिस्ट्रेट की एनओसी हासिल कर नगर निगम में जमा करा पाती है या नहीं।

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