

रचनात्मक कांग्रेस अध्यक्ष ने भानियावाला-ऋषिकेश राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना पर स्वतंत्र समीक्षा की मांग उठाई, कहा- राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे इलाके में हाथियों के कॉरिडोर को भी पहुंच सकता है नुकसान
देहरादून। भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण परियोजना के अंतर्गत सात मोड़ क्षेत्र में हो रही बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर अब सियासत गरमा गई है। रचनात्मक कांग्रेस के अध्यक्ष संदीप दीक्षित ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस परियोजना पर तत्काल पुनर्विचार करने और स्वतंत्र समीक्षा कराए जाने की मांग की है।
पत्र में दीक्षित ने दावा किया कि विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों के हवाले से इस परियोजना के लिए हजारों वृक्षों को काटने की मंजूरी दी जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर विशेष चिंता जताई कि यह इलाका राजाजी टाइगर रिजर्व से बिल्कुल सटा हुआ है और हाथियों समेत तमाम वन्यजीवों की आवाजाही के लिए एक अहम गलियारे के रूप में जाना जाता है, ऐसे में यहां बड़े स्तर पर पेड़ काटे जाने से वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
अपने पत्र में दीक्षित ने प्रदेश सरकार की विकास नीति पर भी तीखा हमला बोला। उनका कहना था कि उत्तराखंड की पहचान सदैव हिमालयी पर्वतों, स्वच्छ नदियों, घने जंगलों और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी रही है, न कि जंगल काटकर बनाई गई चौड़ी सड़कों से। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने विकास को महज कंक्रीट, ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सीमित कर दिया है, जबकि असली विकास तो तब माना जाएगा जब हर क्षेत्र में बेहतर स्कूल-कॉलेज हों, अस्पतालों में डॉक्टर और दवाइयां उपलब्ध हों, युवाओं को सम्मानजनक रोजगार मिले और पलायन थमे।
दीक्षित ने आगे लिखा कि बीते कुछ वर्षों में सरकार लाखों पेड़ों की बलि पहले ही ले चुकी है और जिस भूमि को दुनिया भर में देवभूमि कहकर पूजा जाता है, वहां आज प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय के लिए ये जंगल महज लकड़ी नहीं बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और पूर्वजों से जुड़ाव का प्रतीक हैं, और एक पेड़ के कटने से समुदाय अपने स्थानीय देवी-देवताओं और परंपराओं से भी दूर होता चला जाता है।
पत्र में तिलाड़ी कांड की शहादत और चिपको आंदोलन का उल्लेख करते हुए दीक्षित ने कहा कि जंगलों को बचाने के संघर्ष की विरासत आज की पीढ़ी की रगों में भी बसी है और यही वजह है कि पेड़ों की इस कटाई पर लोग खामोश नहीं बैठ सकते। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए बजट में कटौती होती जा रही है, जबकि जंगल खत्म करने की परियोजनाओं पर भारी भरकम राशि खर्च की जा रही है। उनके अनुसार प्रदेश की जनता अब यह मानने लगी है कि यह सड़क चौड़ीकरण जनता के विकास के लिए नहीं बल्कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए किया जा रहा है।
अपने पत्र के अंत में दीक्षित ने मुख्यमंत्री से चार सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें सात मोड़ परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी व पर्यावरणीय समीक्षा कराने, समीक्षा पूर्ण होने तक वृक्ष कटान पर पूर्ण रोक लगाने, परियोजना से जुड़ी सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियां व अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों के साथ खुला संवाद स्थापित कर सर्वमान्य हल निकालने की मांग शामिल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाते हुए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करेंगे।

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