मधु भट्ट के नेतृत्व में हरेला महोत्सव 2026, भगत सिंह कोश्यारी ने दिया प्रकृति संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश

उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट के नेतृत्व में आयोजित हरेला हरियाली महोत्सव-2026 में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पौधारोपण के साथ उसके संरक्षण का आह्वान किया।

देहरादून। उत्तराखंड की लोक परंपरा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित हरेला हरियाली महोत्सव-2026 का आयोजन इस वर्ष जनभागीदारी और हरित संकल्प का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) श्रीमती मधु भट्ट के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, कलाकारों, शिक्षकों, समाजसेवियों और नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व राज्यपाल एवं पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी ने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और जीवन दर्शन का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल तब तक करे, जब तक वह एक सशक्त वृक्ष न बन जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब समाज स्वयं इसे जनआंदोलन का स्वरूप देगा।

कोश्यारी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी समृद्ध प्राकृतिक धरोहर और लोक संस्कृति से है। ऐसे में हरेला जैसे पारंपरिक पर्व आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने मधु भट्ट द्वारा आयोजित महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं।

महोत्सव का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और उत्तराखंड की पारंपरिक लोक वाद्य ध्वनियों के साथ हुआ। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, भाजपा की प्रदेश महामंत्री आदिति रावत, राज्य मंत्री (दर्जा प्राप्त) भुवन विक्रम डबराल, नेमवाल तथा अशोक शाही सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

हरेला: प्रकृति, संस्कृति और सतत विकास” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों और वक्ताओं ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया। वहीं विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने लोकनृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण तथा उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली संदेश दिया।

महोत्सव के दौरान “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधारोपण किया गया। उपस्थित लोगों ने पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण का सामूहिक संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों, विद्यार्थियों, कलाकारों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।

समापन अवसर पर मधु भट्ट ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थाओं, मीडिया प्रतिनिधियों और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हरेला केवल पौधे लगाने का उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को निभाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब हर व्यक्ति लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझे। उन्होंने अधिकाधिक जनसहभागिता के साथ हरित, स्वच्छ और पर्यावरण संतुलित उत्तराखंड के निर्माण का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है और हरेला महोत्सव इसी सामूहिक सोच और जनसंकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया।

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