देहरादून महायोजना-2041: UPES में 9वें दिन उमड़ी भीड़, विकास के साथ पर्यावरण पर जोर 

10वें दिन हुडा कार्यालय में लगेगा जनसुनवाई शिविर, तहसील चौक पर सुनेंगी MDDA टीम 

देहरादून ।मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा तैयार की जा रही देहरादून महायोजना-2041 को अधिक जनोन्मुखी और व्यावहारिक बनाने के लिए चलाए जा रहे जनसंवाद अभियान का नवां शिविर शुक्रवार को UPES, बिधौली, प्रेमनगर स्थित सैक्टर-9 में आयोजित किया गया। शिविर में स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और भू-स्वामियों की भारी भागीदारी देखने को मिली।

जनसुनवाई के दौरान प्रतिभागियों ने राजधानी के बढ़ते शहरी दबाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की। अधिकांश लोगों ने सड़क नेटवर्क के विस्तार, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग सुविधाओं और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की जरूरत बताई। नागरिकों का कहना था कि बढ़ती आबादी के हिसाब से आधारभूत ढांचे का विकास समय की मांग है।

पर्यावरणीय मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। लोगों ने सुझाव दिया कि शहर के हरित क्षेत्रों, जल स्रोतों और खुले सार्वजनिक स्थलों को संरक्षित रखने के लिए महायोजना में दीर्घकालिक प्रावधान किए जाएं। बढ़ते निर्माण के बीच पर्यावरणीय संतुलन और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर भी चर्चा हुई।
शिविर में जल निकासी, पेयजल उपलब्धता, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कई सुझाव प्राप्त हुए। प्रतिभागियों ने कहा कि भविष्य का देहरादून केवल भौतिक विकास तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन गुणवत्ता को भी बराबर महत्व मिले।

शिविर में जल निकासी, पेयजल उपलब्धता, सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने से जुड़े कई सुझाव प्राप्त हुए। प्रतिभागियों ने कहा कि भविष्य का देहरादून केवल भौतिक विकास तक सीमित न रहे, बल्कि जीवन गुणवत्ता को भी बराबर महत्व मिले।

भू-स्वामियों और संस्थागत प्रतिनिधियों ने भूमि उपयोग प्रस्तावों, विकास नियंत्रण नियमों और क्षेत्र विशेष की जरूरतों पर अपनी राय रखी। MDDA की तकनीकी टीम ने सभी सुझावों और आपत्तियों को दर्ज कर प्रतिभागियों को आश्वस्त किया कि प्रत्येक बिंदु का विशेषज्ञ स्तर पर परीक्षण किया जाएगा।

MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि देहरादून महायोजना-2041 केवल एक नियोजन दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए राजधानी की विकास दृष्टि है। उन्होंने कहा कि जनता से मिल रहे सुझाव योजना को अधिक प्रभावी और जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। “जनभागीदारी के बिना किसी भी शहर का संतुलित विकास संभव नहीं है।”

MDDA सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि जनसुनवाई में प्राप्त सभी सुझावों का व्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा उनका तकनीकी और विधिक परीक्षण किया जाएगा, ताकि अंतिम महायोजना विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए शहर की भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सके।

21 जुलाई तक चलेगा अभियान
MDDA का यह विशेष जनसुनवाई अभियान 21 जुलाई तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जारी रहेगा। प्राधिकरण ने नागरिकों, संस्थाओं और व्यापारिक संगठनों से अधिक से अधिक भागीदारी की अपील की है।

10वें दिन का कार्यक्रम: जनसंवाद अभियान का अगला शिविर *18 जुलाई को उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (हुडा कार्यालय), राजीव गांधी कॉम्प्लेक्स, तहसील चौक* में आयोजित किया जाएगा। यहां अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे और त्वरित निस्तारण की दिशा में कार्रवाई करेंगे।

अधिकारियों का मानना है कि जनता के सुझावों के आधार पर तैयार होने वाली महायोजना देहरादून को समावेशी, सुव्यवस्थित और टिकाऊ विकास की दिशा देगी।

Static 1 Static 1
ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments