

देहरादून। मानसून को देखते हुए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रुहेला ने मंगलवार को देहरादून में अधिकारियों की बैठक लेकर साफ कहा कि इस बार किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं चलेगी। उन्होंने सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में रहने और नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने के निर्देश दिए।
कोषागार सभागार में हुई समीक्षा बैठक में श्री रुहेला ने कहा कि पहाड़ों में बरसात के तीन महीने सबसे संवेदनशील होते हैं। ऐसे में लोक निर्माण, सिंचाई, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम समेत सभी विभागों को पहले से तैयारी पूरी रखनी होगी। उन्होंने अधिकारियों को फोन हमेशा ऑन रखने और फील्ड में जाकर खुद स्थिति देखने को कहा।
बैठक में बताया गया कि भूस्खलन वाले इलाकों, नदी-नालों के किनारे बसी बस्तियों और बंद होने वाले संपर्क मार्गों पर विशेष नजर रखी जाएगी। श्री रुहेला ने पीडब्ल्यूडी को निर्देश दिए कि सड़क बंद होने की स्थिति में जेसीबी और पोकलैंड पहले से संवेदनशील जगहों पर तैनात रहें। सिंचाई विभाग को नदियों के जलस्तर की रोजाना रिपोर्ट लेने को कहा। वहीं नगर निगम को शहर में जलभराव और नालों की सफाई पर फोकस करने को कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग को दवाओं, एंबुलेंस और मेडिकल टीमों के साथ डेंगू, मलेरिया और डायरिया से निपटने की तैयारी रखने के निर्देश दिए। पुलिस और एसडीआरएफ को दूरदराज के क्षेत्रों के लिए राहत और संचार की वैकल्पिक व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल फाइलों में तैयारी काफी नहीं है, जमीनी स्तर पर काम दिखना चाहिए।
उपाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि आपदा के समय अगर किसी विभाग की लापरवाही सामने आई तो आपदा प्रबंधन एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने सभी विभागों को अपना माइक्रो प्लान बनाने और रोजाना रिपोर्ट देने को कहा।
बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जिले के संवेदनशील इलाकों में 66 जेसीबी लगाई गई हैं। नदी चैनलाईजेशन और पुलों की सुरक्षा के काम भी किए गए हैं। बैठक में वन, विद्युत, पेयजल, एनएच और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद श्री रुहेला ने कलेक्ट्रेट में पौधा भी लगाया।

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