

देहरादून। राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिदृश्य पर उत्तराखंड की बढ़ती साख को सशक्त करते हुए देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल (डीडीएलएफ) ने श्रीनगर में आयोजित तीसरे चिनार बुक फेस्टिवल में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (एसकेआईसीसी) में आयोजित इस महोत्सव में साहित्य, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन की कई नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) और श्रीनगर जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस विशेष अवसर पर देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल की ओर से प्रख्यात पर्यावरण कानून विशेषज्ञ एवं संरक्षणवादी नदीम कादरी को प्रतिष्ठित ‘गार्डियंस ऑफ द हिमालयाज़ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता व डीडीएलएफ के मेंटर इम्तियाज़ अली और फेस्टिवल के संस्थापक व प्रोड्यूसर समरांत विरमानी द्वारा प्रदान किया गया।

उल्लेखनीय है कि डीडीएलएफ द्वारा यह सम्मान प्रतिवर्ष पर्यावरण संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को दिया जाता है। सम्मानित होने वाले नदीम कादरी पंपोर स्थित ‘द नेचर यूनिवर्सिटी’ और ‘वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन फंड’ के संस्थापक हैं। वे कश्मीरी बारहसिंगा के संरक्षण के लिए जारी ‘प्रोजेक्ट हंगुल’ के मुख्य प्रेरणास्रोत रहे हैं और ग्रीन इंडिया मिशन के सदस्य होने के साथ-साथ उच्च न्यायालय में एमिकस क्यूरी के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।
महोत्सव के दौरान आयोजित पैनल चर्चा “बियॉन्ड द पोस्टकार्ड: रीडिफाइनिंग टूरिज्म थ्रू लिटरेचर, बुक्स, म्यूज़िक एंड डिजिटल इनोवेशन्स” में समरांत विरमानी ने वक्ता के रूप में विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में पर्यटन का कोई सीमित सीजन नहीं होना चाहिए। वर्षभर सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों के आयोजन से पर्यटन को नया आयाम दिया जा सकता है। उन्होंने युवाओं और बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने पर बल दिया।


इस सफल प्रतिनिधित्व के बाद अब सभी की निगाहें देहरादून लिटरेचर फेस्टिवल के आठवें संस्करण पर टिक गई हैं। डीडीएलएफ का अगला संस्करण 27 से 29 नवंबर तक दून इंटरनेशनल स्कूल, देहरादून में आयोजित होगा, जिसकी थीम “लाइफ, लिटरेचर एंड लेगेसी” रखी गई है।

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