

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की कई महत्वपूर्ण वेबसाइटें शनिवार को संदिग्ध साइबर हमले की चपेट में आ गईं। मालवेयर की आशंका सामने आने के बाद सुरक्षा के मद्देनज़र संबंधित पोर्टलों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। सूचना प्रौद्योगिकी विकास अभिकरण (आईटीडीए) की साइबर सुरक्षा टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बैकअप सिस्टम के माध्यम से अधिकांश वेबसाइटों को कुछ घंटों के भीतर दोबारा चालू कर दिया। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएम रिलीफ फंड) की वेबसाइट पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी थी।
प्रारंभिक जांच में इसे मालवेयर आधारित साइबर हमला माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार हमले के स्रोत की जांच जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि मालवेयर विदेशी नेटवर्क, विशेषकर रूस से जुड़ा है या नहीं। फिलहाल इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
साइबर हमले से मुख्यमंत्री राहत कोष, लोक निर्माण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण, राज्य कर विभाग, ईएसआईसी, परिवहन विभाग और पर्यटन विभाग सहित कुल 10 सरकारी वेबसाइटें प्रभावित हुईं।
आईटीडीए अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2024 में हुए बड़े साइबर हमले के बाद सरकारी वेबसाइटों के लिए मजबूत बैकअप व्यवस्था विकसित की गई थी। इसी कारण इस बार वेबसाइटों का डेटा सुरक्षित रहा और सेवाओं को अपेक्षाकृत कम समय में बहाल कर दिया गया।
गौरतलब है कि अक्टूबर 2024 में उत्तराखंड को अब तक के सबसे बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा था। उस समय मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सहित करीब 90 सरकारी वेबसाइटें प्रभावित हुई थीं और उन्हें सामान्य करने में कई दिन लग गए थे। उसी घटना के बाद साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अतिरिक्त उपाय किए गए थे।
आईटीडीए के महाप्रबंधक (साइबर सिक्योरिटी) अमित जोशी ने बताया कि सुरक्षा प्रणाली ने संदिग्ध मालवेयर की पहचान कर ली थी, जिसके बाद तत्काल आवश्यक कदम उठाकर अधिकांश वेबसाइटों का संचालन सामान्य कर दिया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों से निपटने के लिए विशेषज्ञ टीम लगातार निगरानी और सुरक्षा उपायों पर काम करती रहती है।
वहीं, आईटीडीए के निदेशक आलोक पांडे ने कहा कि कुछ विभागों की वेबसाइटों पर मालवेयर का प्रभाव देखा गया था, जिसे तकनीकी टीम ने शीघ्र दूर कर सेवाएं बहाल कर दीं।

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