

देहरादून। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे ने उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने जर्मनी के बर्लिन स्कूल ऑफ बिजनेस एंड इनोवेशन (बीएसबीआई) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल वी. कराड और बीएसबीआई, बर्लिन के प्रोवोस्ट व ग्लोबल यूनिवर्सिटी सिस्टम्स जर्मनी के मुख्य शैक्षणिक अधिकारी प्रो. डॉ. काइरियाकोस कौवेलियोटिस ने किया। इस अवसर पर बीएसबीआई के डीन प्रो. शिव त्रिपाठी और एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के रजिस्ट्रार गणेश पोकले भी मौजूद थे।
समझौते के तहत दोनों संस्थान शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान और अंतर्राष्ट्रीय छात्र-फैकल्टी गतिशीलता को बढ़ावा देंगे। साथ ही प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण और नवाचार के जरिए वैश्विक दक्षता वाले स्नातक तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।
रजिस्ट्रार गणेश पोकले ने कहा कि यह गठबंधन पूरे शैक्षणिक समुदाय के लिए एक सेतु बनेगा। प्रो. कौवेलियोटिस ने इसे भारत-यूरोपीय शैक्षिक संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत बताया और कहा कि छात्र-फैकल्टी आदान-प्रदान और द्विपक्षीय दौरे तुरंत शुरू किए जाएंगे।
प्रो. कौवेलियोटिस ने शिक्षण में जिम्मेदारी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर भी बात की। उन्होंने कहा कि एआई से फॉर्मेटिंग और सिलेबस अपडेट जैसे प्रशासनिक काम आसान होंगे, जिससे शिक्षकों को छात्रों की मेंटरिंग और संवाद के लिए अधिक समय मिलेगा। उनका मानना है कि एआई का उद्देश्य संसाधन घटाना नहीं, बल्कि शिक्षा के अनुभव को समृद्ध करना होना चाहिए।
उन्होंने छात्र गतिशीलता के रुझान का जिक्र करते हुए बताया कि जर्मनी के पांच संस्थानों में करीब 70 प्रतिशत छात्र भारतीय हैं। उन्होंने ‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए भारतीय संस्थानों से विश्व स्तरीय सुविधाएं देश में ही लाने का आग्रह किया और एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के ‘लाइफ ट्रांसफॉर्मेशन सेंटर’ की सराहना की।
प्रो. कौवेलियोटिस ने एमआईटी-डब्ल्यूपीयू की शांति, सद्भाव और संघर्ष समाधान पर आधारित दार्शनिक पहचान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा नवाचार, जलवायु प्रौद्योगिकी, स्मार्ट विनिर्माण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में यह विश्वविद्यालय अंतर्राष्ट्रीय समाधान दे सकता है और जिम्मेदार वैश्विक नागरिक तैयार कर सकता है।

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