सुप्रीम कोर्ट की अवमानना पर भड़का जनसंघर्ष मोर्चा, विकासनगर तहसील में किया घेराव

10 अक्टूबर 1975 से पूर्व की भूमि को सीलिंग से मुक्त बताने वाले एससी आदेश की अनुपालना न करने पर नाराजगी; नेगी बोले- नहीं हुआ समाधान तो बजेंगे ईंट से ईंट।

विकासनगर। सीलिंग भूमि (चाय बागान भूमि) की आड़ में आमजन के बढ़ते उत्पीड़न और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश की धज्जियाँ उड़ाने के खिलाफ जन संघर्ष मोर्चा ने बुधवार को विकासनगर तहसील में धरना-प्रदर्शन कर हंगामा खड़ा कर दिया। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तहसील परिसर को घेर लिया और उप जिलाधिकारी (एसडीएम) की गैरमौजूदगी में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री रयाल को जिलाधिकारी के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

नेगी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जनपद देहरादून के एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, रायपुर, अंबाडी, कंडोली, मोहकमपुर, बदामावाला, ईस्ट होप टाउन, जीवनगढ़, कांवली, हरबंसवाला, लाडपुर, नत्थनपुर, मलूकावाला व मिट्ठी बहेड़ी सहित करीब दो दर्जन क्षेत्रों के भू-स्वामियों व काश्तकारों को प्रशासन द्वारा जबरन परेशान किया जा रहा है।

क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
मोर्चा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या 2697/1984 में दिनांक 24 अक्टूबर 1996 को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 10 अक्टूबर 1975 से पूर्व खरीदी गई भूमि, यूपी सीलिंग एक्ट की धारा 6 उपधारा (3) के तहत सीलिंग से पूर्णतः मुक्त है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि मूल मालिक ने 1975 से पहले जमीन बेची और खरीदार ने उसे 1975 के बाद किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तांतरित किया, तो भी वह तीसरा व्यक्ति सीलिंग कानून के दायरे में नहीं आता, क्योंकि मूल संपत्ति पहले ही अधिनियम की परिधि से बाहर हो चुकी है।

प्रशासन के आदेश को बताया अवैध
नेगी ने बताया कि इसके बावजूद जिला प्रशासन ने 12 जुलाई 2023 व 16 मई 2023 के आदेशों के माध्यम से तहसीलों को उक्त भूमि के क्रय-विक्रय और दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दे रखे हैं। उन्होंने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट की खुली अवमानना करार देते हुए कहा कि प्रशासन बिना बैनामे, रजिस्ट्री व भूमि की वास्तविक विधिक स्थिति की पड़ताल किए सभी पर एक समान रोक लगाकर आमजन की नींद हराम कर रहा है। उन्होंने कहा कि होना यह चाहिए था कि सीलिंग प्राधिकारी हर केस को उसके स्वामित्व व वर्ष के आधार पर अलग से परखता, लेकिन जल्दबाजी में उठाया गया यह कदम किसी भी दृष्टि से विधिक नहीं ठहराया जा सकता।

मोर्चा ने उठाए ये मुद्दे
मोर्चा ने प्रशासन पर लगाम लगाते हुए कहा कि यदि कोई भूमि वास्तव में सीलिंग की जद में आती है तो उस पर विधिक कार्यवाही अलग से होनी चाहिए, परंतु इस अंधाधुंध रोक के चलते न केवल अधिवक्ताओं का शोषण हो रहा है, बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है।

चेतावनी : ईंट से ईंट बजाने की दी धमकी
रघुनाथ सिंह नेगी ने प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “अगर शीघ्र ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया और अवैध आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो संघर्ष को और तीव्र करते हुए ईंट से ईंट बजाने का काम किया जाएगा।”

किस-किस ने किया प्रदर्शन :
इस ऐतिहासिक घेराव में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, विजय राम शर्मा, दिलबाग सिंह, मोहम्मद आरिफ, गालिब प्रधान, विवेक गुप्ता, के.सी. चंदेल, ब्लॉक अध्यक्ष भीम सिंह बिष्ट, मालती देवी, हाजी असद, संजय गुप्ता, मीडिया प्रभारी अतुल हांडा, राघवेंद्र सिंह, मनीष गुप्ता, नीलम अंथवाल, मुकेश रोहिला, रमेश मल्होत्रा, इंद्रेश रावत, प्रवीण थपलियाल, साक्षी सैनी, पूजा नौटियाल, हिमांशु थापा, वाहिद कुरैशी, मुमताज, क्रिस्टीना, जसकीरत सिंह, विपिन भारद्वाज, अशोक गुप्ता, महेंद्र भंडारी, सुरेशानंद बेलवाल, युवराज तोमर, राजीव गुप्ता, मो. नसीम, सलीम खान, राघव भल्ला, सोमपाल, प्रवेश तोमर, संगीता पैन्युली, चौधरी मामराज, गुरु चरण सिंह, हरीश शाह, सफीक पांडे, यूनुस, उमराव सिंह, बिल्लू गिल्बर्ट, विक्रम पाल, सोनू, शमशाद, ऋषिपाल, सुनील कुमार व नरेश ठाकुर सहित सैकड़ों कार्यकर्ता व क्षेत्रीय नागरिक मौजूद रहे।

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