राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सीएम धामी ने बुनकरों-कारीगरों को किया सम्मानित, ‘लोकल टू ग्लोबल’ पर दिया जोर

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना से 278 शिल्पियों को 4 करोड़ से अधिक का ऋण, 834 लोगों को मिला रोजगार
12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित समारोह में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया और बिच्छू घास यानी नेटल फाइबर से बने पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया।

देहरादून। 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित समारोह में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया और बिच्छू घास यानी नेटल फाइबर से बने पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिवस उन समर्पित बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का प्रतीक है जो अपनी कला और परिश्रम से देश की सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के कारीगर केवल वस्त्र नहीं बनाते, उनमें प्रदेश की संस्कृति, लोकजीवन और परंपराओं की आत्मा समाहित होती है।”

सीएम धामी ने कहा कि हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी-धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प और बिच्छू घास से बने उत्पाद अब देश-विदेश में उत्तराखंड की पहचान बन रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान से इन उत्पादों को नई पहचान मिली है। प्रधानमंत्री स्वयं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान पहनकर राज्य की विरासत को वैश्विक मंच दे रहे हैं।

राज्य सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत अब तक 278 बुनकरों और शिल्पियों को 4 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण और 1 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे लगभग 834 लोगों को रोजगार मिला है। राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर योजना के जरिए आधुनिक मशीनें, डिजाइन, प्रशिक्षण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और विपणन सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति-जनजाति के बुनकरों को प्रशिक्षण, वरिष्ठ शिल्पकारों को शिल्पकार पेंशन और उत्कृष्ट कारीगरों को ‘उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न’ पुरस्कार से सम्मानित करने का काम किया जा रहा है। ई-कॉमर्स, मेले और प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। कई पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग मिलने से ब्रांड पहचान और मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि खरीदारी के समय स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। “हथकरघा उत्पाद खरीदना सिर्फ एक वस्तु खरीदना नहीं है, बल्कि किसी बुनकर परिवार की आजीविका और हमारी विरासत का सम्मान है,” उन्होंने कहा।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में बुनकर, शिल्पकार और उद्यमी मौजूद रहे।

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