

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को दिल्ली कैंट स्थित बेस हॉस्पिटल में ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने न केवल भारतीय रक्षा बलों के अदम्य साहस को दुनिया के सामने रखा, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी महिलाओं के सिंदूर और अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकियों और उनके आकाओं को निशाना बनाने तथा भारत की ओर बुरी नीयत रखने वालों को कड़ा संदेश देने के लिए सेना की कार्रवाई की सराहना की। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शक्ति का प्रतीक था, तो यह रक्तदान शिविर करुणा और सेवा का प्रतीक है।
शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। राजनाथ सिंह ने कहा कि आज एकत्र किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए भरोसेमंद रिजर्व बनेगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान कितनी भी तरक्की कर ले, इंसानी खून का कोई कृत्रिम विकल्प आज तक नहीं बन सका। खून केवल इंसान ही दे सकता है, इसलिए यह दान सबसे पवित्र है।

युवाओं से संवाद करते हुए रक्षा मंत्री ने रक्तदान को संस्कृति का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि 2047 में आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर हमारा लक्ष्य सिर्फ विकसित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक दयालु और स्वस्थ समाज भी होना चाहिए, जहाँ जरूरत के समय खून जैसी बुनियादी जरूरत आसानी से उपलब्ध हो। फिटनेस पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ के जरिए सरकार युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है, क्योंकि एक स्वस्थ व्यक्ति ही समाज और देश के लिए बड़ी ताकत बनता है।
महाराष्ट्र की वीरता परंपरा का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि शिवाजी की धरती के खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान देश सेवा के इतिहास में दर्ज होगा।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री प्रताप राव जाधव, उद्योग मंत्री उदय रवींद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, डीजी एएफएमएस सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वीपीएस कौशिक और बेस हॉस्पिटल के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित थे।

एएफएमएस के अधिकारियों ने बताया कि सैन्य अस्पतालों में रोजमर्रा की चिकित्सा के साथ ऑपरेशन, ट्रॉमा और आपातकाल में खून की निरंतर आपूर्ति जरूरी होती है। शिविर में करीब 500 स्वयंसेवकों की भागीदारी ने ‘सेवा पहले’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि हर योग्य नागरिक नियमित रक्तदान कर लोगों की जान बचाने में योगदान दे सकता है।

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