खड़गे के पुरानी पेंशन बहाली के बयान का NOPRUF ने किया स्वागत, कहा- अब आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय जरूरी

हल्द्वानी । कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा हल्द्वानी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने के दिए गए आश्वासन का राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा (एनओपीआरयूएफ), उत्तराखंड ने स्वागत किया है।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक एवं उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। संगठन ने सभी राजनीतिक दलों व नीति-निर्माताओं से ओपीएस पर स्पष्ट व ठोस दृष्टिकोण रखने की अपेक्षा जताई।

प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने खड़गे का धन्यवाद जताते हुए कहा कि यदि विपक्ष पुरानी पेंशन बहाली की बात कर रहा है तो वर्तमान सरकार को भी बिना देरी किए कर्मचारियों के हित में सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। प्रदेश महासचिव सीताराम पोखरियाल ने कहा कि वर्तमान एनपीएस व्यवस्था में कर्मचारियों के वेतन से कटने वाली राशि व सरकार का अंशदान शेयर बाजार में निवेश होने से जोखिम बना रहता है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

प्रदेश प्रभारी विक्रम रावत ने कहा कि संगठन लंबे समय से चरणबद्ध आंदोलन चला रहा है और यदि सरकार ने गंभीरता नहीं दिखाई तो आंदोलन और व्यापक किया जाएगा। कुमाऊं मंडल संयोजक अनूप पुजारी ने बताया कि चरणबद्ध आंदोलन के तहत 1 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें प्रदेशभर के एनपीएस/यूपीएस से आच्छादित कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

प्रदेश महिला अध्यक्ष रानीता विश्वकर्मा ने कहा कि 1 अक्टूबर को काला दिवस के रूप में मनाते हुए प्रदेशभर के कर्मचारी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे और महिला कर्मचारियों से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भागीदारी की अपील की। प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष (महिला) डॉ. नीतू कार्की ने कहा कि खड़गे के वक्तव्य ने पुरानी पेंशन के विषय को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है, और संगठन का उद्देश्य किसी दल का समर्थन या विरोध नहीं बल्कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

संगठन पदाधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि कर्मचारी समाज जागरूक, संगठित और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठाने के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार को शीघ्र उत्तराखंड में पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी चाहिए।

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