

कांग्रेस नेताओं ने घटना को दलित विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया, कहा—माफी नहीं, कार्रवाई चाहिए
देहरादून । हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित रूप से हवन-यज्ञ कर ‘शुद्धिकरण’ किए जाने के मामले ने उत्तराखंड की सियासत गरमा दी है। कांग्रेस ने इस घटना को दलित सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जोड़ते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला है। विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सेवला कला चौक स्थित अंबेडकर भवन के बाहर भाजपा का पुतला दहन कर प्रदर्शन किया।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संचार विभाग के राष्ट्रीय सचिव वैभव वालिया के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घटना पर आक्रोश जताया। वालिया ने कहा कि यदि किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद उसके आयोजन स्थल को ‘शुद्ध’ करने की बात सामने आती है तो इसे महज राजनीतिक विरोध मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के लिए गंभीर सवाल बताया।
वालिया ने भाजपा के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों को अक्सर ‘फ्रिंज एलिमेंट’ बताया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित लोग भाजपा से जुड़े नहीं हैं तो अब तक उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने सरकार से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से व्यक्त की गई माफी के बावजूद मामला समाप्त नहीं होता। उनके मुताबिक उत्तराखंड सरकार और प्रशासन को घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।

वालिया ने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देता है। ऐसे में जातिगत भेदभाव अथवा अपमान से जुड़ी किसी भी घटना पर सरकार को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहकर कानून के तहत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाती रहेगी।
हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर भी भाजपा और सरकार को घेरा। कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि किसी घटना के बाद उसे ‘फ्रिंज एलिमेंट’ बताकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना के बाद सरकार ने अब तक स्वतः संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की।
उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि हल्द्वानी में खरगे की सभा के बाद कार्यक्रम स्थल का कथित शुद्धिकरण भाजपा और आरएसएस की दलित विरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि खरगे ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई लड़ी है और उनके कार्यक्रम स्थल को लेकर ऐसी घटना गंभीर चिंता का विषय है।
आर्य ने यह भी आरोप लगाया कि हल्द्वानी में कांग्रेस की सभा को रोकने के प्रयास किए गए, लेकिन कांग्रेस की रैली सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उन्होंने घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से जवाब मांगा तथा कार्रवाई की मांग दोहराई।
उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने भी घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में सामने आई घटना भाजपा की सोच को प्रदर्शित करती है और इससे उत्तराखंड शर्मसार हुआ है। गोदियाल ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने पार्टी के सभी संगठनों को इस भावना का पुरजोर विरोध करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने प्रदेश के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से कहा कि कथित घटना के जरिए भाजपा की सोच सामने आ गई है और ऐसे अपमान का समर्थन नहीं किया जाना चाहिए।
पुतला दहन कार्यक्रम में अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मदन लाल, राष्ट्रीय संयोजक नानक चंद समेत डिंपल कुमार, अमन सिंह, राव नसीम, तनवीर, पीयूष गौड़, जगदीश धीमान, रेहाना परवीन, आफताब, वसीम, आयुष सेमवाल, बबलू पंवार, दीपक मंडवाल, कृष्ण कुमार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि हल्द्वानी की घटना को सामान्य राजनीतिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी ने सरकार से मामले की जांच, दोषियों की पहचान और प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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