आईजी की डिनर टेबल से उठा बवाल! किसने बिगाड़ी शाम, किसने परोसी ‘रेड’ की पटकथा?

देहरादून। राजधानी के चर्चित रेस्टोरेंट और नाइट स्पॉट्स पर कार्रवाई की आड़ में जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। मामला केवल एक ‘रेड’ या नियम उल्लंघन का नहीं, बल्कि इसके पीछे की मंशा और समय को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। चर्चा है कि एक डिनर को इस तरह पेश किया गया मानो कोई बड़ा आपराधिक ऑपरेशन चल रहा हो।

सूत्रों के अनुसार सप्ताहांत की देर रात राजपुर रोड स्थित एक प्रतिष्ठित क्लब में आईजी गढ़वाल परिवार सहित डिनर पर मौजूद थे। बताया जा रहा है कि बार संचालन का निर्धारित समय समाप्ति की ओर था और आईजी परिवार भोजन समाप्त ही कर रहा था कि अचानक माहौल बदल गया। क्लब की लाइटें बुझीं, बाहर पुलिस बल की मौजूदगी की खबर फैली और कुछ ही पलों में एक सामान्य डिनर विवाद और चर्चा का केंद्र बन गया।

कहा जा रहा है कि मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी ने यह देखकर हैरानी जताई कि संवेदनशील इलाकों को छोड़कर कई थानों की पुलिस एक निजी प्रतिष्ठान के बाहर क्यों जमा है। सूत्र बताते हैं कि आईजी ने भी इस पर सवाल उठाए। इसी दौरान यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह सब महज संयोग था या किसी ने सोच-समझकर पूरा घटनाक्रम रचा?

मामले को और दिलचस्प बनाती है वह चर्चा, जिसमें कहा जा रहा है कि एक थाना स्तर के अधिकारी ने इस पूरे प्रकरण को ‘रेड’ का रंग देकर मीडिया तक बढ़ा-चढ़ाकर पहुंचाया। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर एक पारिवारिक डिनर को विवाद का रूप देने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या यह केवल अति उत्साह था या किसी पुरानी खीझ का परिणाम?

उधर एसपी सिटी की ओर से वीडियो बयान जारी कर स्थिति साफ करने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आईजी से कोई टकराव नहीं हुआ और न ही पुलिस कप्तान क्लब में पहुंचे थे। उन्होंने यह भी कहा कि वे चेकिंग के बाद लौट रहे थे और बाद में विवाद को बेवजह तूल दिया गया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पुलिस मुख्यालय द्वारा पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद अब चर्चाओं का बाजार और गर्म है। पुलिस महकमे के भीतर भी यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर वह कौन अधिकारी था, जिसकी एक ‘ओवरएक्टिव’ चाल से जिले और रेंज के बीच टकराव की रेखा खिंचती नजर आई।

राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस घटना को लेकर फुसफुसाहट है कि मामला सिर्फ डिनर या कार्रवाई का नहीं, बल्कि पुलिस महकमे के भीतर की अदृश्य खींचतान का संकेत भी हो सकता है। जिस तरह एक मामूली घटनाक्रम को सनसनी बनाकर परोसा गया, उसने कई चेहरों को बेनकाब करने का काम किया है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में ‘डिनर ड्रामा’ की पटकथा किसने लिखी, किसने उसे हवा दी और क्या उस कथित दरोगा तक कार्रवाई की आंच पहुंचेगी, जिसने पूरे घटनाक्रम को विस्फोटक मोड़ दे दिया।

फिलहाल सवाल बरकरार है — यह महज एक डिनर विवाद था या वर्दी के भीतर की कोई सुनियोजित साजिश?

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