कालसी में ‘बैठक’ से लेकर सहसपुर ‘चेकिंग’ तक: एक्शन का दूसरा नाम बने सी.एम.ओ. मनोज शर्मा, मिशन मोड में जनपद भ्रमण

देहरादून। मंगलवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कालसी में चिकित्सा प्रबंधन समिति की बैठक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 मनोज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में सीएमओ द्वारा ए.एन.एम. एवं आशा ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को निर्देशित किया गया कि क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में गृह प्रसव की घटना ना हो, यह सुनिश्चित करें। नयी गर्भवती महिलाओं की प्रथम ए.एन.सी. जांच समय पर करवायें। केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित लाभार्थीपरक व अन्य योजनाओं का लाभा जच्चा बच्चा को ससमय एवं नियमानुसार उपलब्ध करायें।

इसके अतिरिक्त सी.एम.ओ. डॉ0 शर्मा द्वारा सहसपुर के अंतर्गत सेलाकुई क्षेत्र में आयोजित स्वास्थ्य शिविर का निरीक्षण किया गया। सी0एम0ओ0 द्वारा उपस्थित लाभार्थियों को संस्थागत प्रसव के लाभ तथा मातृत्व स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं के परिजन आशा एवं ए.एन.एम. के सहयोग से गर्भवती महिला की निरंतर स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल करायें। प्रसव से पूर्व चिकित्सालय में भर्ती होकर संस्थागत प्रसव करायें तथा सरकारी सुविधाओं का भी लाभ उठायें। शिविर में 35 गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच तथा 45 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गयी। वहीं 115 लोगों की टीबी स्क्रीनिंग की गयी, जिसमें से 102 एक्सरे तथा 2 स्पुटम जांच की गयी। वहीं सहसपुर के झाझरा स्थित विज्ञान संस्थान में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा 56 व्यक्तियों की स्वास्थ्य जांच की गयी तथा 5 दिव्यांग प्रमाण पत्र निर्गत किये गये।

देहरादून के शहरी क्षेत्र में दीपलोक कॉलोनी तथा बंजारावाला स्थित प्राथमिक विद्यालय में भी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिशु एवं गर्भवती महिलाओं की ए.एन.सी जांच व संस्थागत प्रसव संबंधी जागरूकता हेतु आयोजित इन शिविरों में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य परीक्षण जैसे रक्तचाप, मधुमेह, हिमोग्लोबिन आदि जांचें की गयी। दीपलोक कॉलोनी में आयोजित शिविर में 30 गर्भवती महिलाओं की ए.एन.सी. जांच, एक नया पंजीकरण तथा 2 उच्च जोखिम गर्भवती चिन्हित की गयी। दीपलोक कॉलोनी में आयोजित शिविर में ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सालयों द्वारा महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गयी। मेडिकल कॉलेज के द्वारा शिविर में एक नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया गया। नाटक के माध्यम से घरेलू प्रसव को हतोत्साहित करने तथा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।

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