अधिक मास 2026: कब से आरंभ, क्यों होता है और क्या है इसका धार्मिक महत्व?

भारतीय पंचांग और सनातन परंपरा में “अधिक मास” (जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) का विशेष स्थान है। यह कोई सामान्य महीना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और आत्मशुद्धि का दुर्लभ अवसर माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास का आगमन एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है।

कब से शुरू होगा अधिक मास 2026?
वर्ष 2026 में अधिक मास का आरंभ 18 जुलाई 2026 से होगा और इसका समापन 16 अगस्त 2026 को माना जा रहा है। यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इसे “पुरुषोत्तम मास” के नाम से भी जाना जाता है।

अधिक मास क्यों होता है?
हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सौर वर्ष सूर्य के अनुसार चलता है। इन दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर हर वर्ष उत्पन्न होता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर 32 महीने बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे “अधिक मास” कहा जाता है।

यह वैज्ञानिक और धार्मिक समन्वय भारतीय कालगणना की अनूठी विशेषता है, जो समय को संतुलित रखने में मदद करता है।

धार्मिक दृष्टि से महत्व
अधिक मास को आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय माना गया है। इस दौरान—

भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है

गीता, रामायण और पुराणों का पाठ फलदायी माना जाता है

दान, व्रत और तप से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है
मान्यता है कि इस माह में किया गया हर शुभ कार्य सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना फल देता है।

क्या नहीं करना चाहिए इस माह में?

अधिक मास को “मलमास” भी कहा जाता है, इसलिए इस दौरान—

विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते

नए कार्यों की शुरुआत टालना शुभ माना जाता है

हालांकि, पूजा-पाठ, जप-तप और दान के लिए यह अत्यंत शुभ समय होता है।

समाज और जीवन में संदेश
अधिक मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित करने का भी संदेश देता है। यह हमें आत्मनिरीक्षण, संयम और सेवा की ओर प्रेरित करता है।

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक अवसर है—रुककर अपने भीतर झांकने का, अपने कर्मों का मूल्यांकन करने का और सकारात्मक बदलाव लाने का।

अधिक मास 2026 न केवल धार्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई और वैज्ञानिक सोच का प्रतीक भी है। यह महीना हमें बताता है कि जीवन में संतुलन, साधना और सेवा कितनी महत्वपूर्ण है।

इस पुरुषोत्तम मास में यदि श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-पाठ व दान किया जाए, तो यह न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी भरता है।

अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख/सामग्री में दी गई सूचना, तथ्य और विचारों की सटीकता, संपूर्णता, या उपयोगिता के लिए [merouttrakhand.in] किसी भी प्रकार से उत्तरदायी या जिम्मेदार नहीं है। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है और इसे किसी भी पेशेवर सलाह (जैसे धार्मिक, कानूनी, वित्तीय, चिकित्सा, आदि) का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। पाठक इन जानकारियों के आधार पर कोई भी कदम उठाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें या किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।

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