

विकासनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्र लोगों के चयन और पात्र गरीब परिवारों के नाम सूची से हटाए जाने की शिकायत को लेकर जन संघर्ष मोर्चा की ओर से उठाई गई आवाज का असर दिखाई देने लगा है। मोर्चा के तहसील घेराव के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ने खंड विकास अधिकारी विकासनगर को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने बताया कि मोर्चा ने करीब एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक पात्र और गरीब परिवारों तक पहुंचाने तथा चयन सूची की गहन जांच की मांग को लेकर तहसील का घेराव किया था। मोर्चा की मांग को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अब जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नेगी ने आरोप लगाया कि विकासनगर ब्लॉक की प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में कई ऐसे पात्र लोगों के नाम हटा दिए गए, जो वास्तव में योजना का लाभ पाने की स्थिति में हैं। इसके विपरीत सरकारी सेवा में कार्यरत लोगों, उनके परिजनों तथा दो-तीन मंजिला मकान वाले परिवारों के नाम सूची में शामिल किए जाने की शिकायत सामने आई है।
उन्होंने कहा कि यदि संपन्न और अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिया जाता है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की स्थिति पैदा करता है। नेगी के मुताबिक, कुछ साधन-संपन्न लोगों द्वारा अपने वास्तविक पक्के मकानों के बजाय पुराने टीन शेड, गौशालाओं अथवा खंडहरनुमा भवनों को दर्शाकर योजना में पात्रता हासिल करने का प्रयास किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
मोर्चा अध्यक्ष ने प्रशासन से मांग की कि जांच केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित न रखकर मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाए। साथ ही पात्र गरीब परिवारों के नाम सूची में शामिल कर उन्हें योजना का लाभ दिलाया जाए तथा यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने से वास्तविक पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद बढ़ी है। मोर्चा ने भी स्पष्ट किया कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के अधिकारों को लेकर उसका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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