
169 में से 153 नालों की सफाई पूरी, 89 संवेदनशील स्कूल चिन्हित, 73 दुर्गम गांवों की गर्भवती महिलाओं को पहले ही अस्पताल भेजने की तैयारी
देहरादून। मानसून दस्तक देने से पहले ही देहरादून प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। प्रमुख सचिव एवं जनपद प्रभारी डा. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में बुधवार को जिला कार्यालय सभागार में मानसून पूर्व तैयारियों और आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा बैठक हुई, जिसमें जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान समेत तमाम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में जलभराव, भूस्खलन, बाढ़ सुरक्षा, क्लाउडबर्स्ट और वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया गया। बैठक के बाद प्रमुख सचिव ने डीएम और संबंधित अधिकारियों के साथ कार्लीगाड़ और माझाड़ा क्षेत्र सहित आपदा प्रभावित स्थलों का स्थलीय निरीक्षण कर पुनर्वास और नदी चैनलाइजेशन कार्यों का हाल देखा तथा जरूरी निर्देश दिए।
बैठक में जनपद में मौजूद 169 नालों में से 153 की सफाई पूर्ण होने की जानकारी दी गई, जबकि शेष पर काम जारी है। आईएसबीटी क्षेत्र में जलनिकासी की पुरानी समस्या के समाधान के लिए एमडीडीए, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए गए। गत वर्ष जलभराव और जनहानि से प्रभावित स्थलों का पुनः आकलन कर वहां अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया। जनपद में उपलब्ध 39 डी-वॉटरिंग पंपों की तैनाती योजना की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों का डेटा आधारित विश्लेषण कर संभावित जलभराव स्थलों की अग्रिम पहचान पर भी जोर दिया गया।

भूस्खलन के मोर्चे पर जनपद के 12 लैंडस्लाइड जोन और क्रॉनिक स्लिप जोन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। किमाड़ी सहित संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी समाधान और दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। सौंग नदी परियोजना, नंदा की चौकी और आठ संवेदनशील नदी-नाला क्षेत्रों में चल रहे शमन कार्यों की प्रगति भी परखी गई। साथ ही मानसून से पहले सभी लंबित कार्य प्राथमिकता से पूरे करने और खनन से जुड़ी कार्यवाहियां समयसीमा में निपटाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एक अहम तैयारी यह भी सामने आई कि उन 73 दुर्गम गांवों, जहां मानसून में संपर्क टूट जाता है, वहां की गर्भवती महिलाओं को पहले ही नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा और उनके व तीमारदारों के भोजन की व्यवस्था विभाग की ओर से होगी। इसी तरह 89 संवेदनशील स्कूलों की पहचान की गई है, जहां बरसात में नदी-नाले आ जाते हैं। जोखिम वाले स्कूलों में त्वरित कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य विभाग को डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने, नियमित फॉगिंग और जलभराव वाले स्थलों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया। लीकेज मैपिंग में 18 स्थानों पर पानी के रिसाव चिन्हित हुए हैं, जिनके समाधान की कार्यवाही जारी है।


प्रमुख सचिव डा. मीनाक्षी सुंदरम ने स्पष्ट किया कि मानसून में किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित और समन्वित प्रतिक्रिया सभी विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वार रूम और नियंत्रण कक्ष को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने, पूर्व चेतावनी तंत्र को चाक-चौबंद रखने और राहत-बचाव संसाधनों की हर वक्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जनहानि और संपत्ति की क्षति को न्यूनतम किया जा सके।

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