सीबीआई पर भरोसा नहीं, सिटिंग जज निगरानी जरूरी
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजी गई सीबीआई जांच संस्तुति को “देवभूमि की जागरूक जनता की जीत लेकिन अधूरी” करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में होनी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आ सकेगी। गोदियाल ने केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा सरकार होने पर सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
गोदियाल ने शनिवार को यहां जारी बयान में कहा, “यह देवभूमि की जागरूक जनता की जीत तो है, लेकिन अधूरी। केंद्र में भाजपा और राज्य में भाजपा—ऐसे में सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल स्वाभाविक हैं। रसूखदार वीआईपी सत्ता से जुड़े हैं, इसलिए केवल सीबीआई जांच पर्याप्त नहीं।” उन्होंने मांग की कि मामला इतना संवेदनशील है कि सिटिंग जज की निगरानी अनिवार्य हो।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सीबीआई संस्तुति से धामी सरकार ने अपनी पिछली “बड़ी चूक” स्वीकार की है, लेकिन यह प्रयास नाकाफी है। “जब तक वीआईपी का खुलासा नहीं होता, बुलडोजर चलाने वाले अधिकारियों के नाम सामने नहीं आते और उन्हें सजा नहीं मिलती, कांग्रेस का सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।” गोदियाल ने टाइम-बाउंड जांच की भी मांग की, ताकि न्याय में देरी न हो।
2022 में ऋषिकेश रिसॉर्ट में 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने राज्य हिला दिया। पूर्व मंत्री समेत वीआईपी संलिप्तता के आरोप लगे, साक्ष्य मिटाने और बुलडोजर कार्रवाई के विवाद हुए। कांग्रेस के आंदोलनों—कैंडल मार्च, धरनों—के दबाव में सरकार ने शुक्रवार को संस्तुति भेजी। गोदियाल ने कहा, “उत्तराखंड की जनता अनसुलझे सवालों का जवाब चाहती है। देवभूमि की बेटी को न्याय मिलेगा, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे।”
उत्तराखंड कांग्रेस ने घोषणा की कि सिटिंग जज निगरानी के आदेश तक प्रदर्शन जारी रहेंगे। यह बयान इंटक के कैंडल मार्च के ठीक बाद आया, जो पूरे राज्य में गूंज रहा है। भाजपा पर विपक्ष ने वीआईपी बचाने का आरोप लगाया है। मामले पर अब केंद्र और कोर्ट की नजरें हैं।

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