‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ ने उठाया सवाल, सरकारी सुविधाओं की जानकारी न होने पर उठी भौहें
देहरादून । उत्तराखंड की बेटी अंकिता की हत्या के मामले में उसके परिवार को सरकारी सुविधाएं न मिलने का मामला गुरुवार को मुख्य सचिव से लेकर सियासी गलियारों तक गरमाया रहा। ‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से मिला, लेकिन इस मुलाकात ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य सचिव के समक्ष अंकिता के परिवार की दयनीय स्थिति रखी। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से तमाम घोषणाओं के बावजूद परिजनों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जूझना पड़ रहा है। प्रतिनिधि मंडल ने आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता को आज भी पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए मोहताज होना पड़ रहा है।
सबसे हैरान करने वाला पल तब आया जब मुख्य सचिव ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि अब तक सरकार ने अंकिता के परिवार को क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। सरकार के शीर्ष अधिकारी की इस अनभिज्ञता ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, मुख्य सचिव ने पीने के पानी की समस्या पर गंभीरता दिखाई। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल की बातों को सहानुभूतिपूर्वक सुना और इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए कड़े निर्देश देने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों से बात करके इस समस्या का जल्द से जल्द निपटारा कराया जाएगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि हत्या के अभियुक्त के परिजनों को दिया गया टेंडर निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे यह मामला साफ हो गया है कि अब अभियुक्त के परिवार को कोई सरकारी लाभ नहीं मिलेगा।
प्रतिनिधि मंडल में कमला पंत, डॉ. उमा भट्ट, सुजाता पॉल और सूरज उपस्थित रहे। प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व कर रही निर्मला बिष्ट ने कहा कि अंकिता के परिवार को न्याय और सुविधाएं दिलाने का संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य सचिव के आश्वासन को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अब देखना होगा कि सरकार वादा निभाती है या फिर महज आश्वासन देकर टालमटोल करती है।

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