पेरिस,10 सितंबर। नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग को लेकर लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों ने सड़कें जाम कर दीं, कूड़ेदान में आग लगाई और कई जगहों पर पुलिस से भी भिड़ गए। ये प्रदर्शन ऐसे वक्त हो रहे हैं, जब मैक्रों ने बीते दिन ही सेबेस्टियन लेकोर्नू को नया प्रधानमंत्री बनाने का ऐलान किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के लगभग हर बड़े शहर में लोग सड़कों पर हैं। 50 नकाबपोश लोगों ने बोर्डो में सड़कें जाम कर दीं और टूलूज में रेलवे लाइन पर तोड़फोड़ की। मार्सिले, मोंटपेलियर, नैनटेस और ल्योन सहित पूरे फ्रांस में हाईवे पर जाम की खबरें हैं। आंतरिक मंत्री ब्रूनो रिटेलेउ ने कहा कि पश्चिमी शहर रेनेस में एक बस में आग लगा दी गई और एक बिजली लाइन को नुकसान पहुंचाने से ट्रेनें अवरुद्ध हो गईं।
गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलो ने बताया कि पुलिस रातभर से गिरफ्तारियां कर रही हैं। करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। रिटेलो ने कहा कि पूरे देश में 80,000 सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जिनमें से 6,000 पेरिस में हैं। पेरिस पुलिस ने बताया कि अब तक प्रदर्शनों में 132 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। नैनटेस शहर में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। मोंटपेलियर में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई।
इन प्रदर्शनों को ब्लॉक एवरीथिंग नाम दिया गया है, जिसका नेतृत्व एक वामपंथी समूह कर रहा है। हालांकि, आंदोलन का कोई चेहरा नहीं है। इसकी नींव कुछ महीनों पहले ही सोशल मीडिया पर पड़ी थी। यह आंदोलन प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे चुके फ्रांस्वा बायरो की बजट नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ था। बायरो ने सार्वजनिक खर्च में भारी कटौती की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था जनता के काम की नहीं रही है।
3 दिन पहले ही फ्रांस्वा बायरू संसद में विश्वास मत हार गए थे, जिसके कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद मैक्रों ने लेकोर्नु को प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। बीते एक साल में लेकार्नू फ्रांस के चौथे प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं, जो देश में राजनीतिक अस्थिरता का सबूत है। वे आज प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। अपने दूसरे कार्यकाल में मैक्रों पर सत्ता छोड़ने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
फ्रांस की संसद का कार्यकाल 2027 में खत्म होना था, लेकिन यूरोपीय संसद के चुनावों में हार के बाद मैक्रों ने मध्यावधि चुनाव का ऐलान कर दिया था। इसके बाद हुए नेशनल असेंबली के चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इसके बाद से मैक्रों एक कमजोर गठबंधन वाली अल्पमत सरकार चला रहे हैं, जो अपने अस्तित्व के लिए विपक्षी नेता मरीन ले पेन की नेशनल रैली पर निर्भर है।
फ्रांस में सरकार विरोधी प्रदर्शन: लाखों लोग सड़कों पर, कई जगह आगजनी, 200 से ज्यादा गिरफ्तार
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