

देहरादून(आरएनएस)। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने पार्टी के नेता आशुतोष नेगी के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। केंद्रीय अनुशासन समिति ने उन्हें दल की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। समिति ने उन पर सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों के माध्यम से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व एवं वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर भ्रामक, तथ्यहीन और आपत्तिजनक बयान देने तथा लगातार अनुशासनहीन गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप लगाए हैं।
केंद्रीय अनुशासन समिति की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि आशुतोष नेगी द्वारा लगातार सोशल मीडिया और अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर बयानबाजी कर उत्तराखंड क्रांति दल की छवि और संगठनात्मक गरिमा को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। पत्र के अनुसार, इस मामले में समिति की ओर से उन्हें पहले भी 9 जुलाई 2026 को नोटिस जारी किया गया था। इसके जवाब में नेगी ने 17 जुलाई 2026 को खेद व्यक्त किया था। इसके बावजूद समिति के अनुसार उनके सार्वजनिक बयानों और आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं आया।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि आशुतोष नेगी केंद्रीय कार्यालय पहुंचे थे और वहां केंद्रीय अध्यक्ष के संबंध में कथित तौर पर अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया। इसके बाद उन्हें उनके पद से मुक्त किया गया था।
समिति के अनुसार, उस समय भी उन्हें पार्टी की मर्यादा और अनुशासन का पालन करने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से संगठन की छवि प्रभावित नहीं करने की सलाह दी गई थी। अनुशासन समिति ने अपने आदेश में आशुतोष नेगी के पार्टी से जुड़े पुराने घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। पत्र के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2024 में उत्तराखंड क्रांति दल की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी। पार्टी ने उनके अनुरोध पर उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर दिया था। इसके साथ ही उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक दायित्व से भी सम्मानित किया गया था। समिति ने इसे दल की ओर से युवाओं को आगे बढ़ाने की नीति का हिस्सा बताया है। हालांकि, पत्र में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद नेगी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ लगातार तथ्यहीन और भ्रामक आरोप लगाए।
पत्र के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को केंद्रीय अनुशासन समिति ने आशुतोष नेगी को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए निर्देशित किया था। समिति ने उनसे कहा था कि यदि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है तो उसके समर्थन में ठोस प्रमाण और साक्ष्य पार्टी के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं। समिति के मुताबिक, इसका उद्देश्य आरोपों की सत्यता की जांच कर दोषी या दल विरोधी गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करना था। हालांकि, समिति का कहना है कि नेगी की ओर से न तो संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया गया और न ही इसके बाद उनके व्यवहार एवं सार्वजनिक बयानों में अपेक्षित सुधार दिखाई दिया। अनुशासन समिति ने आगामी विधानसभा चुनावों का भी पत्र में उल्लेख किया है।
पत्र के अनुसार, पार्टी ने चुनाव लड़ने के इच्छुक सदस्यों से औपचारिक आवेदन आमंत्रित किए थे, लेकिन आशुतोष नेगी की ओर से अभी तक कोई औपचारिक आवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया। समिति के मुताबिक, नेगी ने रायपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की बात कही थी और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी उन्हें सकारात्मक संकेत दिए गए थे। इसके बावजूद समिति का आरोप है कि अपने क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने के बजाय उनके द्वारा लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियां की जाती रहीं।
केंद्रीय अनुशासन समिति ने अपने आदेश में कहा है कि नेगी को अपने आचरण में सुधार करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन उनके व्यवहार में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आया। समिति ने उनके पूर्व आचरण, जारी किए गए नोटिस, प्राप्त स्पष्टीकरण और उसके बाद की गतिविधियों पर विचार करने के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया। पत्र में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि चुनावी वर्ष में नेगी के आचरण से ऐसा प्रतीत होता है कि उनके द्वारा संगठन को राजनीतिक और संगठनात्मक रूप से नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने आशंका जताई है कि यह गतिविधियां दल विरोधी एवं राजनीतिक दलों के साथ मिलकर संगठन को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से की जा रही हैं। केंद्रीय अनुशासन समिति ने कार्रवाई के तहत आशुतोष नेगी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें छह वर्ष के लिए उत्तराखंड क्रांति दल से निष्कासित कर दिया है।
साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि निष्कासन की अवधि के दौरान वह उत्तराखंड क्रांति दल के नाम, झंडे, चुनाव चिह्न अथवा किसी अधिकृत प्रतीक का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्हें स्वयं को पार्टी का अधिकृत पदाधिकारी या प्रतिनिधि प्रदर्शित करने से भी रोक दिया गया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निष्कासन की अवधि में पार्टी के नाम, झंडे, चुनाव चिह्न अथवा अधिकृत प्रतीक का इस्तेमाल किया गया या स्वयं को दल का अधिकृत प्रतिनिधि बताया गया तो पार्टी की ओर से नियमानुसार और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। आदेश पर राकेश सेमवाल के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से लागू होगी।

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