
हरिद्वार। उत्तराखंड के पवित्र शहर हरिद्वार के वीआईपी घाट पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के चार दिवसीय किसान महाकुंभ (राष्ट्रीय चिंतन शिविर) की शुरुआत हो गई है। मंगलवार से शुरू हुए इस आयोजन में देशभर से हजारों किसान, नेता और कार्यकर्ता जुटे हैं। यह महाकुंभ 15 से 18 जून तक चलेगा, जिसमें किसानों की प्रमुख समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हो रही है।
आयोजकों के अनुसार, इस किसान कुंभ का उद्देश्य किसान एकता को मजबूत करना, विभिन्न राज्यों की कृषि संबंधी योजनाओं की समीक्षा करना और केंद्र व राज्य सरकारों से लंबित मांगों को उठाना है। राकेश टिकैत समेत भाकियू के प्रमुख नेता इस दौरान हरिद्वार में मौजूद रहेंगे। मंच से किसानों की समस्याओं जैसे एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की कानूनी गारंटी, भूमि अधिग्रहण, फसल की उचित कीमत, कृषि ऋण माफी, बिजली दरें, सिंचाई सुविधाएं और सब्सिडी जैसे मुद्दों पर जोरदार चर्चा हो रही है।
राकेश टिकैत ने भूमि अधिग्रहण को देश का सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि किसानों की जमीनें अक्सर कम कीमत पर ली जा रही हैं और कई स्थानों पर जबरन अधिग्रहण की शिकायतें आ रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की अनदेखी की गई, खासकर ट्रेड डील्स में, तो देशव्यापी आंदोलन की तैयारी की जाएगी। महाकुंभ के दौरान किसान नेता सरकार को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें इन मांगों को शामिल किया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी ने बताया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के किसान बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। महंगाई के मुकाबले फसलों के दाम न बढ़ने, 2000 रुपये की सहायता राशि बढ़ाने और अन्य सुविधाओं पर भी विचार-विमर्श हो रहा है। यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।
किसान महाकुंभ की परंपरा भाकियू (टिकैत) की पुरानी है, जिसमें किसान संगठन अपनी रणनीति तय करते हैं। इस बार वीआईपी घाट पर टेंट, लंगर और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं।
यह आयोजन किसानों की आवाज को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है। महाकुंभ के निष्कर्षों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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