भट्ट ने जोशीमठ ओबीसी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने का मुद्दा संसद में उठाया!

छावनी बोर्ड निधि आवंटन में देरी, सिविल क्षेत्रों के पालिका सम्मिलन प्रक्रिया और लंबित चुनाव के चलते

देहरादून । भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने जोशीमठ की ओबीसी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने का विषय केंद्र के समक्ष उठाया हैं। संसद के पटल पर छावनी बोर्ड को लेकर पूछे सवाल के ज़बाब में केंद्र ने सिविल क्षेत्रों को नगरपालिका में शामिल करने की प्रक्रिया को चुनाव और निधि आवंटन में देरी का कारण बताया है।

उनके द्वारा राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान लंबे समय से लंबित चमोली जोशीमठ क्षेत्र के ओबीसी की इस मांग को उठाया गया। सदन के माध्यम से उन्होंने केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराए हुए कहा, उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जनपद स्थित जोशीमठ क्षेत्र के पैनखण्ड क्षेत्र की 73 जातियों को राज्य सरकार द्वारा अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में अधिसूचित किया गया हैं। किंतु उन्हें अभी तक भारत सरकार की केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है। जबकि जोशीमठ के पैनखण्डा समुदाय को ओबीसी की केन्द्रीय सूची में शामिल करने की बेहद आवश्यकता है। जो न केवल हमारे प्रदेश के सामाजिक आर्थिक ढांचे से जुडा है बल्कि यह हमारे संविधान की मूल भावना को भी समर्पित है, जो समता, न्याय और अवसर की समानता पर आधारित है।

उन्होंने इस विषय से प्रभावित लोगों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय सूची में सम्मिलित न होने के कारण संबंधित समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक छात्रवृत्ति, योजनाओं रोजगार के अवसरों तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा है। जबकि राज्य में पहले से ही कई समुदाय ओबीसी श्रेणी में शामिल हैं और पैनखण्डा समुदाय भी उसी समानता की उम्मीद करता है। यह विषय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों तथा संविधान के अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4) की भावना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा की गई अनुशंसाओं के बावजूद इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

वहीं विश्वास जताते हुए कहा कि जोशीमठ के पैनखण्डा समुदाय को ओबीसी की केन्द्रीय सूची में शामिल करने से न केवल इस समुदाय को लाभ मिलगा बल्कि यह समाज के समग्र विकास की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा। जिसके लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि जोशीमठ क्षेत्र की संबंधित अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में सम्मिलित करने हेतु शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए।

इसी तरह एक अन्य महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए उनके द्वारा छावनी बोर्डों के लंबित चुनाव और वित्त आयोग द्वारा इन बोर्डों को दिए जाने वाले अनुदान को लेकर सवाल पूछा गया। जिसपर ज़बाब देते हुए रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने बताया कि वर्तमान वर्ष में, 29 छावनी बोर्ड केन्द्रीय वित्त आयोग अनुदानों के अंतर्गत पहले ही निधियां प्राप्त कर चुके हैं। उत्तराखण्ड राज्य में स्थित छावनी बोर्डों के मामले में वहां चुनाव न होने को सीएफसी अनुदानों की गैर-प्राप्ति के लिए एक कारण है। इस मसले पर सिद्धान्ततः यह निर्णय लिया गया है कि चयनित छावनियों को सिविल क्षेत्रों से अलग करें और उन्हें संबंधित राज्य की नगरपालिकाओं में शामिल किया जाए। चूंकि अलग करने की प्रक्रिया का परिणाम छावनी बोर्डों की शासन संरचना प्रभावित करती है, इसलिए बोर्डों के चुनाव अभी तक नहीं कराए गए हैं। यह मामला वर्तमान में दिल्ली, तेलंगाना और मध्य प्रदेश की माननीय उच्च न्यायालयों में भी लंबित है।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments