विरासत महोत्सव में ‘चक्रव्यूह’ ने किया मंत्रमुग्ध, क्विज में ओक ग्रोव स्कूल बना विजेता

देहरादून। देहरादून में चल रहे प्रतिष्ठित विरासत महोत्सव में आज शनिवार का दिन सांस्कृतिक विरासत प्रेमियों के लिए विशेष और महत्वपूर्ण रहा। एक ओर जहां विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने ‘विरासत प्रश्नोत्तरी 2025’ में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर महाभारत काल की पौराणिक “चक्रव्यूह” सैन्य संरचना के भव्य नाट्य मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सुबह के सत्र में आयोजित ‘विरासत प्रश्नोत्तरी 2025’ में देहरादून के 18 प्रतिष्ठित विद्यालयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। क्विज़ मास्टर डॉ. सरगम मेहरा की देखरेख में लिखित परीक्षा के बाद दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस), समर वैली स्कूल और ओक ग्रोव स्कूल (दो टीमें) सहित चार विद्यालय चरण-चरण के लिए अर्हता प्राप्त कर पाए।

कई चुनौतीपूर्ण दौर के बाद, आयुषी गुप्ता और चार्वी प्रताप सिंह (दोनों कक्षा 12) की टीम वाला ओक ग्रोव स्कूल विरासत प्रश्नोत्तरी 2025 का विजेता बना। उपविजेता का स्थान दून इंटरनेशनल स्कूल (सिटी कैंपस) ने प्राप्त किया, जिसका प्रतिनिधित्व ऐश्वर्या प्रताप सिंह और आद्या राय ने किया। क्विज प्रतियोगिता में देश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों और उत्तराखंड से संबंधित अनेक स्थलों पर प्रश्न पूछे गए। कार्यक्रम के अंत में विरासत की समन्वयक सुश्री राधा चटर्जी ने विजेताओं और उपविजेता टीमों को प्रमाण पत्र प्रदान किए।

विरासत महोत्सव में आज शनिवार शाम को पौराणिक एवं ऐतिहासिक महाभारत काल के चक्रव्यूह नाट्य मंचन की आकर्षक एवं भव्य प्रस्तुति की गई, जिसे देखकर उमड़ी हज़ारों की भीड़ आश्चर्य चकित रह गई। इस प्रस्तुति ने महाभारत में वर्णित सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संरचनाओं में से एक “चक्रव्यूह” की सदियों पुरानी कथा को प्रभावशाली ढंग से जीवंत कर दिया।
मशहूर कलाकार पंकज कुमार नैथानी के निर्देशन और श्रीनगर (गढ़वाल) के प्रोफेसर डॉ. डी.आर. पुरोहित की पटकथा के मार्गदर्शन में, विद्याधर के श्रीकाल (श्रीनगर, गढ़वाल) के कलाकारों ने प्रस्तुति दी। इस नाट्य मंचन में युवा योद्धा अभिमन्यु के अद्भुत एवं बेहतरीन साहस को दर्शाया गया, जिन्होंने शत्रु के चक्रव्यूह में प्रवेश तो कर लिया, लेकिन बाहर निकलने का रहस्य नहीं जानते थे। उन्होंने द्रोण, कर्ण, दुर्योधन और अन्य शक्तिशाली योद्धाओं के विरुद्ध वीरतापूर्वक युद्ध किया।
उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र की स्थानीय परंपराओं को दर्शाते हुए, यह प्रस्तुति पांडव लीला और पांडव नृत्य जैसे अनुष्ठान प्रदर्शनों के माध्यम से इन पौराणिक कथाओं को समकालीन दर्शकों से जोड़ती है। इस शानदार मंचन में जयद्रथ की भूमिका में पंकज नैथानी, द्रोणाचार्य की भूमिका में गौरव नेगी, कर्ण की भूमिका में गणेश बलूनी और अभिमन्यु की भूमिका में अंकित भट्ट सहित कुल 41 कलाकारों ने अपनी शानदार भूमिका का निर्वहन कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया।

संगीत समूह और वाद्य यंत्रवादकों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे हुड़का, ढोल, दमाऊ, बांसुरी और भंकोरे का उपयोग कर प्रस्तुति को और अधिक भव्य बना दिया।
प्रोफेसर दाताराम पुरोहित के नेतृत्व में गढ़वाली लोक कलाकारों की टीम ने चक्रव्यूह का शानदार चित्रण कर उपस्थित विशाल दर्शकों का मन मोह लिया। यह प्रस्तुति न केवल अभिमन्यु की अदम्य वीरता को श्रद्धांजलि थी, बल्कि हिमालयी क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और गढ़वाली लोक नाट्य, पारंपरिक संगीत के सम्मिश्रण का भी अद्भुत उदाहरण थी। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के महंत देवेन्द्र दास जी और विश्वविद्यालय के छात्रों का भी इस आयोजन में विशेष योगदान रहा।

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