

रायपुर। उत्तराखण्ड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने रायपुर क्षेत्र में एक निजी विद्यालय से जुड़ी CSAM (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल) से संबंधित गंभीर शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर जांच की। शिकायत क्षेत्रवासियों के माध्यम से आयोग के संज्ञान में आई थी, जिसके बाद आयोग सदस्य श्री दयाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने संबंधित विद्यालय का निरीक्षण किया।
जांच में सामने आया कि प्रभावित बच्चे रायपुर क्षेत्र के निवासी हैं तथा विद्यालय के प्रधानाचार्य को घटना की जानकारी पूर्व में मिल चुकी थी, बावजूद इसके पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप पुलिस को सूचित नहीं किया गया। यह भी पाया गया कि प्रभावित बच्चे की पहचान विद्यालय के छात्र के रूप में होने के बावजूद उसे विद्यालय आने से रोक दिया गया। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए रायपुर थाना पुलिस को साइबर अपराध एवं पॉक्सो अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की है और कार्रवाई की आख्या भी मांगी है।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कई गंभीर कमियां भी सामने आईं। लगभग 250 वर्ग मीटर क्षेत्र में करीब 450 बच्चे अध्ययनरत पाए गए, जबकि विद्यालय तक पहुंचने का मार्ग मात्र 15 फीट चौड़ी संकरी गली से होकर गुजरता है, जो आपातकालीन निकासी की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। परिसर में लोहे की सीढ़ियां बिना सुरक्षा कवर के, विद्युत पैनल खुली अवस्था में तथा अग्निशमन यंत्र गैर-कार्यशील स्थिति में पाए गए। लगभग 15×15 फीट के एक कक्ष में करीब 40 एलकेजी बच्चों को बैठाया गया था, जहां वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था नहीं थी।

विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं पाई गई—शौचालय अस्वच्छ स्थिति में थे और फर्स्ट एड बॉक्स भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका। इसके अतिरिक्त एक शिक्षिका द्वारा एक बच्चे के साथ अनुचित व्यवहार की जानकारी भी आयोग के संज्ञान में आई। विद्यालय में खेल मैदान अथवा सामूहिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान भी नहीं पाया गया, जबकि एलकेजी कक्षा हेतु लगभग ₹900 प्रतिमाह शुल्क लिया जा रहा था।
आयोग ने प्रधानाचार्य को विद्यालय के समस्त अभिलेख, मान्यता दस्तावेज एवं शिक्षकों की योग्यता प्रमाणपत्रों सहित उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं तथा शिक्षा विभाग से विद्यालय की मान्यता व संचालन की स्थिति पर विस्तृत आख्या मांगी है। आयोग ने क्षेत्रवासियों को निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन देते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और बाल संरक्षण कानूनों की किसी भी प्रकार की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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