

लोक संवर्धन पर्व में CM धामी बोले लोक संस्कृति और पर्यावरण हमारी सबसे बड़ी पहचान
गढ़ रत्न नेगी के योगदान को सराहा, CM ने कहा- लोकगीतों ने दुनिया तक पहुंचाई उत्तराखंड की पहचान
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित लोक संवर्धन पर्व के अंतर्गत हरेला उत्सव में प्रतिभाग कर प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हरेला केवल हरियाली का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता से जुड़ने का एक जनआंदोलन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरेला उत्तराखंड की लोक परंपराओं का महापर्व है जो समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में जोड़ता है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज भी पूरे उत्साह के साथ इस पर्व में सहभागी बन रहा है। यही हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत और “विविधता में एकता” की भावना का सबसे बड़ा उदाहरण है।
सीएम धामी ने कहा कि लोक संवर्धन पर्व के माध्यम से राज्य की लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं को नई पहचान मिल रही है। उन्होंने प्रसिद्ध लोकगायक एवं ‘गढ़ रत्न’ नरेंद्र सिंह नेगी के योगदान का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति, लोकजीवन, पर्यावरण, महिलाओं के संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को देश-दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने हरेला को प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का महत्व बहुत पहले समझ लिया था। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से जूझ रही है, तब उत्तराखंड का हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश देता है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने इस वर्ष हरेला पर पूरे प्रदेश में 10 लाख पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बना दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माता के सम्मान में एक पौधा अवश्य लगाए और उसके पेड़ बनने तक उसकी देखभाल का संकल्प ले। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत उत्तराखंड में दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य है, जिसमें से अब तक लगभग 1 करोड़ 15 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। यह उपलब्धि जनभागीदारी और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाकर विकास कर रही है। लोक संवर्धन पर्व लोक कलाकारों, शिल्पकारों, बुनकरों और हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को प्रोत्साहन देने का बड़ा मंच है। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद केवल आर्थिक सहयोग नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाने और हजारों परिवारों की आजीविका मजबूत करने का माध्यम भी है। सरकार लोक कलाकारों और उद्यमियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने अंत में सभी नागरिकों से अपने परिवारों के साथ लोक संवर्धन पर्व में सहभागी बनने और उत्तराखंड की लोक कला, संस्कृति व परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, मेयर सौरभ थपलियाल, गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, लोक कलाकार, शिल्पकार, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में मातृशक्ति व युवा उपस्थित रहे।

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