देहरादून। सहसपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत धौलास-हरियावाला की विवादित भूमि अब पूरे प्रदेश में गरमागरम बहस का केंद्र बन चुकी है। यह मामला न केवल नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाने का है, बल्कि आईएमए जैसी संवेदनशील सैन्य संस्था की सुरक्षा, देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और डेमोग्राफिक बदलाव की साजिश से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घोटाले पर अपना सबसे सख्त और निर्णायक रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि देवभूमि उत्तराखंड में किसी भी प्रकार की तुष्टीकरण की राजनीति, छिपी साजिशों या नियमों की अवहेलना को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा—दोषी पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई अवश्यम्भावी है।
सहसपुर के परवल में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि धौलास की इस 20 एकड़ भूमि आवंटन की हर बारीकी, हर दस्तावेज और हर पहलू की गहन जांच के सख्त आदेश जारी कर दिए गए हैं। हमारी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर अटल है—अगर जांच में यह साबित होता है कि शैक्षणिक संस्थान के नाम पर ली गई कृषि भूमि को नियम तोड़कर प्लॉटिंग कर बेचा गया, या इसका उद्देश्य बदल दिया गया, तो फौरन आवंटन रद्द कर पूरी भूमि को राज्य सरकार में निहित कर लिया जाएगा। उन्होंने और सख्त लहजे में जोड़ा कि कांग्रेस के पुराने शासनकाल में हुई ऐसी तुष्टीकरण वाली नीतियां अब नहीं चलेंगी—देवभूमि में विधर्मी मंशा या सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को मुंहतोड़ जवाब मिलेगा।
इस बीच, सहसपुर विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक सहदेव सिंह पुंडीर ने भी इस प्रकरण पर मोर्चा संभाला है। उन्होंने इसे स्थानीय जनभावनाओं पर सीधा हमला और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया। विधायक ने कहा कि सहसपुर की जनता के हित, देवभूमि की मर्यादा और आईएमए की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं होगा—हम इस साजिश को बेनकाब कर कार्रवाई सुनिश्चित करवाएंगे।

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