
देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बीते पांच वर्षों के दौरान हुए अभूतपूर्व विकास और सुशासन की गाथा अब आमजन के बीच पहुंच रही है। प्रदेशभर में मनाए जा रहे “सेवा, सुशासन एवं समर्पण सप्ताह” के तीसरे दिन सोमवार को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) सभागार में उत्तराखंड की बदलती तस्वीर को बयां करती एक भव्य विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में बुनियादी ढांचे के विकास, आधुनिक कनेक्टिविटी और जनहित से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया, जिसे देखने के लिए नोडल अधिकारियों, प्राधिकरण के कर्मचारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी।
मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 4 जुलाई से 10 जुलाई 2026 तक आयोजित हो रहे इस विशेष सप्ताह का मुख्य उद्देश्य सरकार की जन-कल्याणकारी उपलब्धियों को सीधे जनता तक पहुंचाना है। एमडीडीए सभागार में सजी इस प्रदर्शनी में उत्तराखंड के बदलते स्वरूप की जीवंत झलक देखने को मिली। डिस्प्ले पैनल्स और सूचनात्मक सामग्रियों के माध्यम से चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, अत्याधुनिक रोपवे नेटवर्क, क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना (उड़ान) और शहरी नियोजन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स की प्रगति को साझा किया गया। प्रदर्शनी ने यह साफ संदेश दिया कि राज्य सरकार न केवल बड़े शहरों बल्कि सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों को भी आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि पिछला कुछ समय उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे के लिए स्वर्णिम रहा है। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी में हुए अभूतपूर्व सुधारों ने राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास को एक नई रफ्तार दी है, और इन उपलब्धियों से आम नागरिकों को रूबरू कराना बेहद जरूरी है ताकि वे सरकार के प्रयासों को करीब से समझ सकें। वहीं, एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने जनभागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी विकास योजना की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब शासन और जनता के बीच मजबूत संवाद हो। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के आयोजनों से न केवल नागरिकों में जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि वे राज्य की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार बनने के लिए भी प्रेरित होंगे। कुल मिलाकर, यह प्रदर्शनी उत्तराखंड को एक आधुनिक और सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करने के सरकारी संकल्प को दोहराने का एक प्रभावी माध्यम साबित हुई।

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