

वेद-उपनिषद से सीखें जीवन मूल्य, सत्य-ईमानदारी से ही मजबूत होगा राष्ट्र: राज्यपाल
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि) ने शनिवार को लोक भवन में राष्ट्रीय सैनिक संस्था द्वारा आयोजित ‘नई शिक्षा नीति में नैतिक शिक्षा’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्था के सदस्यों को सम्मानित भी किया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक के साथ-साथ नैतिक शिक्षा और चरित्र निर्माण से भी जोड़ा जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विश्व गुरु बनने के संकल्प को संस्कारवान युवा ही साकार कर सकते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद और ऋषि-मुनियों की शिक्षाएं नई पीढ़ी को जीवन मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने सत्य, ईमानदारी, निष्ठा और आत्मानुशासन को राष्ट्र निर्माण की बुनियाद बताया।
राज्यपाल ने कहा कि नैतिक शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, इसे व्यवहार में अपनाना होगा। यह उपदेश से नहीं, उदाहरण से सीखी जाती है। उन्होंने राष्ट्रीय सैनिक संस्था के सदस्यों से आह्वान किया कि वे विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, राष्ट्र प्रेम, अनुशासन और सेवा भावना को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों के अनुभव का उपयोग नेतृत्व विकास और नैतिक शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए किया जाना चाहिए।


राज्यपाल ने संस्था के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में राष्ट्रीय सैनिक संस्था सराहनीय कार्य कर रही है। ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ाने और युवाओं में राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, राष्ट्रीय सैनिक संस्था के अध्यक्ष कर्नल टी.पी. त्यागी, लेफ्टिनेंट जनरल अश्विनी बक्शी, मेजर जनरल जी.के. थपलियाल, प्रो. नीलम पंवार, श्री राजन छिब्बर, मेजर जनरल ओ.पी. सोनी सहित संस्था के पदाधिकारी, पूर्व सैनिक, शिक्षाविद और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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