देहरादून : सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन धूमधाम से कर रही है उत्तरायणी कौतिक का आयोजन

देहरादून। देहरादून में पहली बार उत्तरायणी कौतिक, देहरादून के परेड ग्राउंड में 11 से 14 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है। सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक प्रतिदिन कौतिक का आयोजन होगा।

उत्तरायणी कौतिक के भव्य आयोजन के लिए कुमाऊं के लोग प्राची जन-कल्याण सेवा समिति के माध्यम से जुटे हुए हैं। कौतिक के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी होंगे। सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन की अध्यक्ष गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, विधायक खजान दास समेत कई हस्तियां आयोजन में शिरकत करने वाली हैं।

बता दें देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरती पर मनाया जाने वाला उत्तरायणी कौतिक कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और एकता का प्रतीक है। यह पर्व केवल एक मेला नहीं, बल्कि जड़ों से जुड़ने, लोकगीत–लोकनृत्य, खान-पान, वेशभूषा और आपसी भाईचारे को सहेजने का उत्सव है।

कौतिक के आयोजकों ने कहा है इस पावन अवसर पर देहरादून में आप सभी का सपरिवार आगमन हमारे लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। आइए, मिलकर उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करें, नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ें और एकता, सद्भाव व उत्साह के साथ उत्तरायणी कौतिक का आनंद लें। आपकी उपस्थिति से यह आयोजन और भी भव्य व स्मरणीय बनेगा।

जानें… उत्तरायणी कौतिक के बारे में
उत्तरायणी कौतिक उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का एक प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मेला है, जो मकर संक्रांति पर आयोजित होता है। मुख्य तौर पर सरयू नदी के तट पर स्थित बागेश्वर के बागनाथ मंदिर परिसर में इसका भव्य आयोजन होता है।

ऐतिहासिक महत्व
वर्ष 1921 में मकर संक्रांति के दिन कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे के नेतृत्व में, बागेश्वर की सरयू नदी के तट पर स्वतंत्रता सेनानियों ने कुली बेगार प्रथा से संबंधित सारे रजिस्टर बहा दिए थे। यह आंदोलन अंग्रेजों की अमानवीय कुली उतार और कुली बेगार प्रथा के विरोध में था, जिसमें ग्रामीणों को बिना पारिश्रमिक के अंग्रेजों का बोझा ढोना पड़ता था।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यह मेला मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने की खुशी में मनाया जाता है। इसे कुमाऊं में ‘घुघुतिया’ त्यौहार के रूप में भी जाना जाता है। उत्तरायणी के पावन पर्व पर प्रसिद्ध कुमाऊंनी छोलिया नृत्य दल और नंदा राजजात की शोभायात्रा निकाली जाती है।

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