दिल्ली: उत्तराखंड SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ कांग्रेस नेताओं का चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा

कुमारी शैलजा के नेतृत्व में विरोध; मतदाता सूची से पात्र नाम हटाने का आरोप

नई दिल्ली। उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी एवं सांसद कुमारी शैलजा के नेतृत्व में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, यशपाल आर्या, गुरदीप सिंह सप्पल, करण माहरा, हरक सिंह रावत, पवन खेड़ा समेत अन्य नेता मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने ‘वोटों की धांधली बंद करो’ जैसे नारे लगाए। कांग्रेस का आरोप है कि SIR के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। कुछ लोगों को मनमाने ढंग से अनुपस्थित या मृतक बता दिया जा रहा है, जबकि युवाओं को गलत तरीके से मृत चिह्नित किया जा रहा है। नोटिस जारी तो किए जा रहे हैं, लेकिन वे संबंधित लोगों तक नहीं पहुंच रहे और दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

कुमारी शैलजा ने कहा कि वे आयोग को ज्ञापन सौंपने आए थे। गेट पर ताला लगा होने और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें बाहर ही प्रतीक्षा करनी पड़ी। बाद में कुछ नेताओं को अंदर जाने की अनुमति मिली। उन्होंने आयोग पर आरोप लगाया कि वह अपनी स्वायत्तता का इस्तेमाल नहीं कर रहा और सरकार की नीतियों के आगे झुक रहा है। शैलजा ने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए निष्पक्ष प्रक्रिया जरूरी है।

पृष्ठभूमि और आंकड़े

उत्तराखंड में SIR का पहला चरण जून-जुलाई में पूरा हुआ। ड्राफ्ट मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या लगभग 83 लाख से घटकर करीब 71 लाख रह गई। करीब 19 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां पाई गईं, जिनके लिए नोटिस जारी किए गए। दावे एवं आपत्तियों का चरण भी चल रहा है, जिसमें फॉर्म-6, 7 और 8 के तहत लाखों आवेदन आए हैं। कांग्रेस ने पहले भी मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर खामियों का जिक्र किया था, जिसमें एक ही अधिकारी को कई मतदान केंद्रों पर ड्यूटी लगाने और फर्जी आपत्तियों का आरोप शामिल था।

कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली, बरेली जैसे बाहरी स्थानों के मोबाइल नंबरों से आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं और कुछ क्षेत्रों में विशेष समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। पार्टी ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है। चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। आयोग पहले भी SIR को मतदाता सूची शुद्ध करने की वैध प्रक्रिया बता चुका है।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने लोकतंत्र की मजबूती और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की वकालत की। यह घटना उत्तराखंड में SIR को लेकर सियासी गर्माहट के बीच हुई है, जहां दोनों प्रमुख दल इस प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं।

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