​दून मेडिकल कॉलेज की बड़ी कामयाबी: टीबी और MDR-TB के इलाज में पेश की मिसाल

देहरादून। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग ने वर्ष 2025 में टीबी एवं MDR-TB के उपचार में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष कुल 1441 टीबी मरीजों का उपचार किया गया, जिनमें 872 पल्मोनरी टीबी (PTB) पॉजिटिव, 449 एक्स्ट्रा-पल्मोनरी टीबी तथा 120 बाल रोगी शामिल हैं।

कुल 57 MDR-TB मरीजों का प्रबंधन किया गया, जिनमें से 24 मरीजों को शॉर्टर BPaLM रेजीमेन पर रखा गया है।

MDR-TB क्यों बनती है बड़ी चुनौती?

विशेषज्ञों के अनुसार MDR-TB मुख्यतः निम्न कारणों से विकसित होती है:

दवाओं का अधूरा या अनियमित सेवन,गलत दवा संयोजन,उपचार बीच में छोड़ देना,पूर्व में टीबी का अपर्याप्त इलाज,संक्रमित MDR रोगी के संपर्क में आनायह स्थिति उपचार अवधि बढ़ाती है, दुष्प्रभावों का खतरा बढ़ाती है और संक्रमण के सामुदायिक प्रसार की आशंका भी बढ़ाती है।

टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (TPT) पर भी जोर संस्थान में सक्रिय संपर्क ट्रेसिंग और टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (TPT) पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि उच्च जोखिम समूहों — विशेषकर बच्चों एवं पारिवारिक संपर्कों में रोग की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी उन्मूलन की दिशा में इलाज के साथ-साथ रोकथाम रणनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

“अक्षय मित्र” पहल से पोषण सहयोगटीबी रोगियों के पोषण समर्थन के लिए Akshay Mitra पहल के अंतर्गत सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा दिया जा रहा है।इस योजना के माध्यम से रोगियों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उपचार अनुपालन और रिकवरी दर बेहतर हो सके।

शैक्षणिक व प्रशासनिक सुदृढ़तारेस्पिरेटरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ अनुराग अग्रवाल के नेतृत्व में विभाग न केवल जटिल MDR मामलों का उपचार कर रहा है, बल्कि पीजी विद्यार्थियों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं।

प्राचार्या डॉ गीता जैन के कार्यभार संभालने के बाद से विभागीय कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। उन्होंने MDR-TB प्रबंधन और प्रिवेंटिव रणनीतियों में विभाग की उपलब्धियों की सराहना की।

Government Doon Medical College में MDR-TB पर बड़ी सफलता2025 में 1441 टीबी मरीजों का इलाज, 57 MDR-TB रोगियों का समर्पित प्रबंधनदून मेडिकल कॉलेज का संदेश स्पष्ट है — दवा-प्रतिरोधी टीबी जैसी चुनौती के बावजूद, वैज्ञानिक उपचार, रोकथाम रणनीति और सामाजिक सहयोग से टीबी उन्मूलन की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

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