डॉ. गीता खन्ना की सख्ती: हरिद्वार-दून के संवेदनशील मामलों पर बाल आयोग अलर्ट, 7 दिन में रिपोर्ट तलब — लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

देहरादून । उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) ने हरिद्वार और देहरादून में सामने आए दो बेहद गंभीर मामलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने दोनों घटनाओं को बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

हरिद्वार जनपद के खानपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में आयोग ने विशेष चिंता जताई है। इस प्रकरण में पुलिस की कथित लापरवाही भी सामने आने पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम सहित सभी संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत संवेदनशील और त्वरित तरीके से की जाए। साथ ही, घटना की समय-रेखा, आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई, संबंधित पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्यवाही और पीड़िता व उसके परिवार की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी 7 दिन के भीतर उपलब्ध करानी होगी।

आयोग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि पीड़ित बालिका को तत्काल मनोवैज्ञानिक परामर्श, समुचित चिकित्सा सुविधा, ट्रॉमा सपोर्ट, कानूनी सहायता और प्रभावी पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह इस कठिन समय से उबर सके।

दूसरी ओर, देहरादून के राजपुर क्षेत्र में स्थित एक छात्रावास में 17 वर्षीय किशोर की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु ने भी आयोग को चिंतित कर दिया है। झारखंड निवासी यह किशोर राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की तैयारी के लिए देहरादून आया था। आयोग ने इस मामले में मृत्यु के कारणों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, छात्रावास प्रबंधन से पूछताछ और अन्य छात्रों की सुरक्षा व मानसिक स्वास्थ्य के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी 3 दिन के भीतर मांगी है।

डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया है कि सभी मामलों में किशोर न्याय अधिनियम, POCSO अधिनियम और पीड़ित प्रतिकर योजनाओं के प्रावधानों का पूर्णतः पालन किया जाए, ताकि पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा मिल सके।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments