

देहरादून। वक्त कब हंसती-खेलती जिंदगी को मातम में बदल दे, कोई नहीं जानता। 31 अगस्त और 1 सितंबर की दरमियानी काली रात देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में एक ऐसी भयावह त्रासदी लेकर आई, जिसने दो परिवारों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। बारिश की एक खौफनाक रात, कंडोली-बिधोली पुल के पास उफान मारता बरसाती रपटा और उसमें समाती दो गाड़ियां—यह नजारा जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई।
उस रात पानी का बहाव इतना बेकाबू था कि गाड़ियों में सवार युवाओं को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सूचना मिलते ही पुलिस, SDRF, NDRF और फायर सर्विस की टीमें तुरंत राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। रेस्क्यू टीम ने अपनी जान पर खेलकर उफनती नदी के बीच फंसी स्कॉर्पियो (HR 08 AG 8743) से हरियाणा निवासी 22 वर्षीय संभव को तो मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन उसका 21 वर्षीय साथी अक्षय (निवासी जयपुर, राजस्थान) जिंदगी की जंग हार गया। जब पुलिस ने गाड़ी से अक्षय का बेजान शरीर बाहर निकाला, तो हर आंख नम हो गई।
वहीं, दूसरी ओर बही क्रेटा कार (RJ13 CE- 5641) में सवार अंश बवेजा और सहज प्रीति कौर को तो रेस्क्यू टीम ने बचा लिया, लेकिन मात्र 19 साल की मासूम कनन सचदेवा (पुत्री विकास सचदेवा, निवासी पीलीबंगा, हनुमानगढ़, राजस्थान) को वक्त की बेरहम लहरें खींच कर ले गईं। कनन का शव जब नदी के ठंडे पानी से बरामद हुआ, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा पसीज गया।

दाखिले की खुशी, मातम में बदली… ये सिर्फ दो जानें नहीं थीं, ये दो परिवारों की उम्मीदें थीं, जो एक पल में मिट गईं। बताया जा रहा है कि स्कॉर्पियो सवार युवक प्रेमनगर के एक निजी संस्थान में पढ़ते थे, जबकि क्रेटा सवार साथी अपनी एक दोस्त का दाखिला कराने राजस्थान से देहरादून आए थे। मृतक कनन सचदेवा खुद तांतिया यूनिवर्सिटी, गंगानगर से MBBS की पढ़ाई कर रही थी—एक ऐसी बेटी, जो कल डॉक्टर बनकर न जाने कितने लोगों की जानें बचाती, आज खुद नियति के क्रूर खेल का शिकार हो गई।
जिन घरों में कल तक बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने बुने जा रहे थे, वहां आज सिर्फ चीखें और कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा है। कोरोनेशन अस्पताल भेजे गए शव जब अपनों के सुपुर्द होंगे, तो माता-पिता का वो रोना और बिलखना किसी भी पत्थर दिल इंसान को झकझोर कर रख देगा।

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