

नैनीताल। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के विजन के अनुरूप लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय परिसर में एक महत्वपूर्ण पूर्व-बैठक आयोजित की गई। बैठक में विशेष रूप से मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने की, जिसमें विभिन्न बीमा कंपनियों के राज्य प्रमुख एवं वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में लंबित एमएसीटी मामलों को आपसी समझौते के माध्यम से शीघ्र निस्तारित कर वादकारियों को त्वरित मुआवजा उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर गंभीर मंथन किया गया।
समिति की सचिव नेहा कुशवाहा ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे उच्च न्यायालय में लंबित अपने एमएसीटी मामलों के अलावा अन्य ऐसे मामलों की पहचान करें, जो राजीनामा या आपसी समझौते के आधार पर निस्तारित किए जा सकते हैं। इनमें दीवानी मामले, शमनीय आपराधिक मामले, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, श्रम एवं रोजगार विवाद, बैंक रिकवरी सहित अन्य शमनीय प्रकृति के मामले शामिल हैं। उन्होंने वादकारियों से आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाने का आह्वान किया है।
बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से मामलों का त्वरित एवं अंतिम निस्तारण संभव है। इससे वादकारियों को बार-बार अदालत के चक्कर काटने, लंबी कानूनी प्रक्रिया एवं अतिरिक्त खर्च से मुक्ति मिलती है। आपसी सहमति से विवाद समाधान होने पर भविष्य में विवाद की संभावना भी कम हो जाती है। लोक अदालत में निस्तारित मामलों में न्यायालय शुल्क की वापसी का भी प्रावधान है।
न्यायमूर्तियों ने निर्देश दिए कि निस्तारण के प्रयास केवल एमएसीटी तक सीमित न रहें, बल्कि पारिवारिक विवाद, श्रम मामले, बैंक रिकवरी एवं शमनीय आपराधिक मामलों सहित अन्य समझौता योग्य मामलों में भी सुलह की संभावनाएं तलाशी जाएं। पुराने लंबित मामलों की पहचान कर उनके शीघ्र निस्तारण के लिए सकारात्मक प्रयास करने पर जोर दिया गया।
न्यायमूर्तियों ने बीमा कंपनियों एवं संबंधित संस्थाओं को वादकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर लोक अदालत के माध्यम से अधिक से अधिक मामलों के समयबद्ध समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए। समिति ने सभी पक्षों से उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए अधिकाधिक मामलों को समझौते के आधार पर निस्तारित कराने में सहयोग करने की अपेक्षा की है।

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