वन कर्मियों की हड़ताल जारी, सरकार के रुख पर टिकी निगाहें

हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड में जंगलों के लिए सबसे संवेदनशील माने जाने वाले फायर सीजन की शुरुआत से पहले ही वन कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। 13 फरवरी से कार्य बहिष्कार कर रहे वन बीट अधिकारी एवं वन आरक्षी संघ ने अब सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।

मंगलवार को हल्द्वानी स्थित वन विभाग के कंजरवेटर भवन पर वन कर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। इस बीच, प्रमुख वन संरक्षक (होफ) उत्तराखंड ने वन कर्मियों की मांगों से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार इन रक्षकों को क्या सौगात देती है।

क्या हैं वन कर्मियों की मुख्य मांगे?

  1. उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 को पुनः लागू किया जाए।
  2. 10 वर्षों की संतोषजनक सेवा के बाद पदोन्नति सुनिश्चित की जाए।
  3. वन आरक्षियों की वर्दी में संशोधन कर (एक स्टार) का प्रावधान किया जाए।
  4. एक माह का अतिरिक्त वेतन और आहार भत्ता दिया जाए।
  5. समस्त वन आरक्षियों को वाहन भत्ता बढ़ाकर दिया जाए।

संघर्ष के लिए तैयार वनकर्मी
शिवालिक वृत्त के कोषाध्यक्ष अजय पंवार ने साफ कहा कि यदि सरकार ने वन बीट अधिकारियों की मांगों को नजरअंदाज किया, तो वन दरोगा एवं अन्य संघ भी समर्थन में उतर आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि 12 वर्षों की सेवा के बावजूद प्रमोशन नहीं मिल रहा है, जबकि नए पदों की भर्ती कर पुरानी रिक्तियों को दबाया जा रहा है।

वन आरक्षी संघ के अध्यक्ष अनुज कांबोज ने सरकार को कड़े शब्दों में चेताया, “यदि हमारी मांगे नहीं मानी गईं, तो वन आरक्षियों का अगला कदम ऐसा होगा कि सरकार की नींव हिल जाएगी।”

धरना स्थल पर मौजूद अन्य पदाधिकारी
इस प्रदर्शन में अंकित राठौर, संदीप राठौर, राजवीर राठौड़, अभिषेक राठौड़, राहुल (मीडिया प्रभारी), देहरादून अध्यक्ष गौरव, शुद्धा उनियाल, रेणु समेत कई वन कर्मी उपस्थित रहे।

फायर सीजन में जंगलों की सुरक्षा राम भरोसे!

उत्तराखंड में गर्मियों में लगने वाली आग हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल को तबाह कर देती है। ऐसे में जब वन कर्मी ही हड़ताल पर हैं, तो जंगलों की सुरक्षा का संकट और गहरा गया है।

अब देखना यह होगा कि सरकार वन विभाग के इन रक्षकों की मांगों को पूरा कर समाधान निकालती है या फिर आंदोलन और तेज होगा?

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