स्पीकर ने आपदा-कानून व्यवस्था पर बहस को ठुकराया, विपक्ष का हंगामा बेकार
₹5,315 करोड़ का अनुपूरक बजट, नौ विधेयक पारित, पर सवालों का जवाब गायब
भराड़ीसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में 19 और 20 अगस्त को आयोजित विधानसभा सत्र महज डेढ़ दिन में ही समाप्त हो गया। यह सत्र, जो मूल रूप से 22 अगस्त तक चलने वाला था, केवल दो घंटे 40 मिनट की कार्यवाही के साथ सिमट गया। इस दौरान न तो कोई प्रश्नकाल हुआ, न ही जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर कोई सार्थक चर्चा। विपक्ष ने आपदा और कानून व्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर नियम 310 के तहत बहस की मांग की, लेकिन स्पीकर ऋतु खंडूरी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
विपक्ष का शोर, सत्ता का खेल
सत्र के पहले दिन से ही विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने सदन में कागज फाड़े, माइक हिलाए और ‘तानाशाही सरकार’ बोलके सरकार के खिलाफ खिलाफ नारेबाजी की। आपदा और कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग को ठुकराए जाने पर कांग्रेस विधायकों ने विधानभवन के मंडप में रात गुजारने का ऐतिहासिक कदम उठाया। गद्दे-रजाई बिछाकर रातभर धरना दिया, लेकिन यह प्रदर्शन भी सत्ता पक्ष को विचलित नहीं कर सका। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष को मनाने की कोशिश की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
आपदा और कानून व्यवस्था पर चुप्पी
हाल ही में धराली-हर्षिल में आई भीषण आपदा और नैनीताल के बेतालघाट में हुई गोलीबारी व अपहरण की घटनाओं ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक ने कानून व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी की थी। विपक्ष ने उम्मीद जताई थी कि कम से कम आपदा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सदन में चर्चा होगी, जिससे प्रभावितों की समस्याएं सामने आ सकें। लेकिन स्पीकर ने इस मांग को अनसुना कर दिया। इससे सत्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठने लगे हैं।
क्या हुआ डेढ़ दिन में?
पहले दिन सदन की कार्यवाही 1 घंटे 45 मिनट और दूसरे दिन मात्र 55 मिनट चली। इस दौरान बार-बार स्थगन हुआ। शोर-शराबे के बीच सत्ता पक्ष ने ₹5,315 करोड़ का अनुपूरक बजट और नौ विधेयक बिना किसी चर्चा के पास करवा लिए। नए संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल की भी इस सत्र में कोई खास परीक्षा नहीं हो पाई।
पारित विधेयक और बजट के मुख्य बिंदु
अनुपूरक बजट: ₹5,315.39 करोड़, जिसमें ₹2,152.37 करोड़ राजस्व खर्च और ₹3,163.02 करोड़ पूंजीगत खर्च शामिल।
केंद्र पोषित योजनाएं: ₹1,689.13 करोड़ का प्रावधान।
बाह्य सहायतित योजनाएं: ₹215 करोड़ का प्रावधान।
पारित विधेयक:
उत्तराखंड विनियोग (अनुपूरक) विधेयक, 2025
उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश श्री बदरीनाथ व श्री केदारनाथ मंदिर (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2025 (एंटी-कन्वर्जन बिल)
उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड साक्षी संरक्षण निरसन विधेयक, 2025
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक, 2025
समान नागरिक संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2025
उत्तराखंड लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक, 2025
गैरसैंण सत्र पर सवाल
इस सत्र को गैरसैंण ले जाने की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं। भारी खर्च के साथ पूरी सरकारी मशीनरी को गैरसैंण लाया गया, लेकिन डेढ़ दिन में ही सत्र समेट लिया गया। कई लोग कह रहे हैं कि इससे बेहतर तो देहरादून में ही सत्र आयोजित कर लिया जाता।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं
सत्र समाप्त होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई यूजर्स ने इसे ‘मैच फिक्सिंग’ करार दिया, तो कुछ ने सत्ता और विपक्ष की मिलीभगत पर सवाल उठाए। लोग पूछ रहे हैं कि जब जनता के मुद्दों पर चर्चा ही नहीं होनी थी, तो इतना तामझाम क्यों?
25 साल में सिकुड़ती बहस
पिछले 25 सालों में उत्तराखंड के बजट का आकार 25 गुना बढ़ गया है। विधायकों के वेतन, भत्ते और सुविधाएं भी बढ़ती जा रही हैं। लेकिन अगर कुछ सिकुड़ा है, तो वह है सदन में सार्थक बहस और चर्चा का दायरा। गैरसैंण का यह सत्र भी इस सच्चाई को उजागर करता है कि जनता के सवाल अब भी पहाड़ों की तरह अटके हुए हैं।

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