
मेरठ 19 अगस्त (आरएनएस ) जानलेवा हमले के मामले में सात आरोपितों को क्लीनचिट देने के एवज में 50 हजार रुपये लेने वाले दारोगा और एसओ को निलंबित कर दिया गया है। दोनों की विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं।
संजय द्विवेदी को फलावदा से हाल में परीक्षितगढ़ थाने का प्रभारी बनाया गया था। 28 अप्रैल को गांव नगला हरेरू निवासी हमदान पुत्र सरफराज ने थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि जमानत पर जेल से आने के बाद दोपहर को अपने भाई शबाउद्दीन उर्फ शब्बू के साथ खेतों पर गया था। हमदान का आरोप है कि दो बाइकों पर सवार खुर्रम, कल्लू, नकीब, टाटी समेत सात लोग आए। उन्होंने दोनों पर गोली चला दी। पैर में गोली लगने से शब्बू घायल हो गया। आरोपितों ने उस पर भी गोली चलाई, लेकिन वह बच गया।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कर विवेचना दारोगा योगेश गिरी को दी। विवेचना में सामने आया कि पीड़ित ने आरोपित पक्ष को फंसाने के लिए खुद ही गोली मारी थी। पुलिस ने 248 बीएनएस के तहत कार्रवाई करते हुए मुकदमा वादी हमदान को ही जेल भेज दिया।
एक सप्ताह पहले हमदान के स्वजन की तरफ से एसएसपी विपिन ताडा से शिकायत की गई। आरोप लगाया कि 50 हजार की रकम लेकर आरोपितों को क्लीनचिट दी गई है। बाकायदा आडियो रिकार्डिंग भी सौंपी गई। एसएसपी ने सीओ सदर देहात से मामले की जांच कराई। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद विवेचक योगेश गिरी और विवेचना का सुपरविजन करने वाले एसओ संजय द्विवेदी को सस्पेंड कर दिया। एसएसपी ने कहा कि दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी बैठा दी गई है।

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