देहरादून।प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य परंपरा के सर्वोच्च गुरु, ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ कथित रूप से किए गए व्यवहार को लेकर संत समाज और सनातन अनुयायियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इस पूरे घटनाक्रम को धर्म, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा आघात बताते हुए भारतीय गो-क्रांति मंच (रजि.) ने मामले की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है।
संगठन द्वारा प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि मौनी अमावस्या जैसे पवित्र पर्व पर गंगा स्नान के लिए प्रयागराज पहुंचे शंकराचार्य जी का उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं पुलिस द्वारा किया गया व्यवहार न केवल असंवेदनशील था, बल्कि सनातन परंपरा के अपमान जैसा है। संगठन का कहना है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक घटना नहीं, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था से जुड़ा विषय है।
शंकराचार्य जी परंपरागत रूप से पालकी में गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें पालकी से उतरने का दबाव बनाया गया। स्थिति बिगड़ने पर कथित तौर पर साधु-संतों और शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की हुई, कपड़े फाड़े गए और कुछ संत गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस दौरान शंकराचार्य जी को कथित रूप से अज्ञात स्थान पर ले जाया गया, जिससे उनकी सुरक्षा और गरिमा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि शंकराचार्य जी पूर्व वर्षों में भी कुंभ और अन्य पर्वों पर इसी परंपरा के अनुसार पालकी से स्नान करते रहे हैं। उत्तराखंड स्थित ज्योतिर्मठ (नरसिंह मंदिर) से लेकर बदरिकाश्रम तक आज भी यह परंपरा जीवित है। ऐसे में इस परंपरा को रोकना न केवल ऐतिहासिक अज्ञानता है, बल्कि सनातन संस्कृति के मूल स्वरूप का अपमान भी है।
भारतीय गो-क्रांति मंच ने मीडिया के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति से मांग की है कि इस संपूर्ण प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी धर्मगुरु, साधु-संत या धार्मिक परंपरा के साथ इस प्रकार की घटना दोहराई न जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि यह मामला किसी एक व्यक्ति से जुड़ा नहीं, बल्कि सनातन धर्म, गुरु-परंपरा और संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित है। उन्हें विश्वास है कि न्याय होगा और देश में धर्म, परंपरा एवं संविधान—तीनों के प्रति आस्था बनी रहेगी।
इस अवसर पर भारतीय गौ क्रांति मंच के प्रदेश महामंत्री यशवंत सिंह रावत,आचार्य गीता शरण जी, बलबीर सिंह पंवार, आचार्य रमेश प्रसाद सेमवाल, अनुसूया प्रसाद उनियाल, विकास पाटनी, आनंद सिंह रावत, कमल किशोर भट्ट सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित रहे।

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