स्वास्थ्य भर्ती विवाद : अभ्यर्थियों ने परीक्षा पोर्टल बंद करने की मांग उठाई

देहरादून। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अभ्यर्थियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य की वर्तमान भर्ती प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे भ्रमित, असंतुलित और अपारदर्शी बताया। अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की कि स्वास्थ्य भर्तियों के लिए संचालित परीक्षा पोर्टल को तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए और नई, स्पष्ट व पारदर्शी भर्ती नीति लागू होने तक किसी भी प्रकार की प्रक्रिया न चलाई जाए।

अभ्यर्थियों ने वर्षवार (ईयर-वाइज) भर्ती प्रणाली लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि नर्सिंग सहित स्वास्थ्य सेवाओं के अनेक अभ्यर्थी वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में वर्षवार विज्ञापन आने से प्रतियोगिता संतुलित होगी और लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को न्याय मिल सकेगा। उनका कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग की भर्तियां अलग-अलग समय पर निकालने के बजाय एक साथ जारी की जाएं, ताकि अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी मांग की गई कि सभी स्वास्थ्य भर्तियां IPHC मानकों के अनुरूप की जाएं, जिससे जनसंख्या अनुपात के हिसाब से वैज्ञानिक तरीके से स्टाफ की तैनाती हो और राज्य का स्वास्थ्य ढांचा मजबूत हो सके। अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा का स्वागत किया, लेकिन साथ ही चिंता जताई कि कॉलेज तैयार होने में समय लगेगा, जबकि इस बीच हजारों अभ्यर्थी ओवर-एज हो जाएंगे।

अभ्यर्थियों ने सरकार से विशेष रूप से आग्रह किया कि वर्षवार भर्ती व्यवस्था तत्काल लागू की जाए और ओवर-एज हो रहे योग्य अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष छूट दी जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके और राज्य को प्रशिक्षित नर्सिंग व स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता भी बनी रहे। प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर, सचिव राजेंद्र कुकरेती, प्रदेश मीडिया प्रभारी प्रवेश रावत, प्रदेश प्रवक्ता स्तुति सती, कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप चमोली, अजीत भंडारी, प्रकाश लेखवार, लक्ष्मी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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