आईआईटी कानपुर और समग्र शिक्षा उत्तराखंड ने 15 हजार छात्रों के साथ मनाया अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस

हल्द्वानी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और समग्र शिक्षा उत्तराखंड के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस 2026 के अवसर पर एक विशेष ऑनलाइन आउटरीच सत्र आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के 15,000 से अधिक छात्र और 500 शिक्षक शामिल हुए। 1969 में मानवता की पहली चंद्र लैंडिंग की वर्षगांठ पर आयोजित इस सत्र का उद्देश्य युवाओं को चंद्र विज्ञान, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़ी वैज्ञानिक प्रगति से जोड़ना था।

सत्र का संचालन इसरो के क्षेत्रीय सुदूर संवेदन केंद्र उत्तर, नई दिल्ली के वैज्ञानिक शंकर राम एन आर ने किया। सुदूर संवेदन और भू-स्थानिक तकनीकों के विशेषज्ञ शंकर राम ने डॉ. विक्रम साराभाई की परिकल्पना से लेकर भारत के चंद्र मिशनों तक की पूरी यात्रा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कैसे चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर जल अणुओं की खोज कर इतिहास रचा, चंद्रयान-2 से मिली सीखों ने आगे का मार्ग प्रशस्त किया और चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर भारत को विश्व में अग्रणी स्थान दिलाया। उन्होंने भारत के आगामी मिशनों की भी जानकारी दी, जिनमें चंद्रयान-4, गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजने की दीर्घकालिक योजना शामिल है। साथ ही उन्होंने अपोलो मिशनों, नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम और भविष्य में स्वायत्त लैंडिंग, रोवर नेविगेशन के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता व रोबोटिक्स की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

यह सत्र आईआईटी कानपुर के विस्तृत एसटीईएम आउटरीच तंत्र के माध्यम से संचालित हुआ। इसके जरिए उत्तराखंड के 160 अटल टिंकरिंग लैब्स और 13 एस्ट्रोफिजिक्स लैब्स, जम्मू-कश्मीर की एस्ट्रोफिजिक्स लैब्स, अरुणाचल प्रदेश की अटल टिंकरिंग लैब्स, पढ़ाई-लिखाई एआई लैब्स और 15 राज्यों के ‘साथी’ केंद्रों को जोड़ा गया। तकनीक आधारित इस मंच ने शहरी, ग्रामीण और दूरदराज के छात्रों को एक साथ जोड़कर विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर दिया। छात्रों ने इस दौरान चंद्रमा की उत्पत्ति, उसकी भौतिक विशेषताओं और पृथ्वी व ब्रह्मांड को समझने में चंद्रमा के महत्व के बारे में भी जानकारी ली।

राजकीय इंटर कॉलेज चम्बा, टिहरी गढ़वाल के रसायन विज्ञान व्याख्याता सुरेंद्र कुमार बिंद ने कहा कि इस तरह के विशेषज्ञ-नेतृत्व वाले सत्र एस्ट्रोफिजिक्स लैब और अटल टिंकरिंग लैब में हो रहे व्यावहारिक शिक्षण को पूरक बनाते हैं और छात्रों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाते हैं। वहीं राजस्थान के खेतड़ी नगर स्थित केंद्रीय विद्यालय साथी केंद्र के छात्र दिव्यांश ने कहा कि इसरो के वैज्ञानिक से सीधे बातचीत का अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा और इससे भारत के चंद्र मिशनों की गहरी समझ मिली। समग्र शिक्षा और आईआईटी कानपुर की यह पहल एसटीईएम शिक्षा में छात्रों की रुचि को मजबूत करने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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