जल जीवन मिशन 2.0: ग्रामीण जल सुरक्षा के लिए उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा ने केंद्र के साथ किया समझौता

नई दिल्ली/देहरादून। केंद्र सरकार द्वारा जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 को मंजूरी दिए जाने के बाद, देश में ग्रामीण जल प्रबंधन को एक नई दिशा देने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में आज नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा राज्यों के साथ सुधार संबंधी ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करते हुए जवाबदेह प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से टिकाऊ ग्रामीण जल वितरण सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

विकसित भारत @2047 के संकल्प की ओर कदम
इस सुधार संबंधी समझौते का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके तहत ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले सेवा-आधारित मॉडल को अनिवार्य बनाया गया है, जिससे ग्रामीण जल प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव में सुधार होगा। यह पहल न केवल ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर को ऊपर उठाएगी, बल्कि ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उत्तराखंड की उपलब्धियों पर विशेष चर्चा
वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य की प्रगति का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जल जीवन मिशन के तहत 98% कवरेज हासिल कर ली है, जहाँ 14.48 लाख ग्रामीण परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को नल का कनेक्शन दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘सारा’ (SARARA) प्राधिकरण के माध्यम से जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वर्षा जल संचयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तराखंड सरकार समझौते के सभी बिंदुओं का सख्ती से पालन करेगी ताकि हिमालयी राज्य के निवासियों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा मिल सके।

केंद्रीय मंत्री का राज्यों से आह्वान
केंद्रीय मंत्री  सी.आर. पाटिल ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह मिशन अब एक जन-आंदोलन बन चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि मिशन की समय सीमा को बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दिया गया है, ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा सके। उन्होंने तीनों राज्यों से आग्रह किया कि वे ग्राम पंचायत स्तर पर जल कर संग्रह और संचालन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने जोर दिया कि जल जीवन मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह महिलाओं और ग्रामीण समुदायों के स्वास्थ्य एवं सम्मान को बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम है।

समझौता ज्ञापन पर उत्तराखंड की ओर से सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग रणवीर सिंह चौहान और केंद्र की ओर से संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीना नाइक ने हस्ताक्षर किए। इस दौरान पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव श्री अशोक के.के. मीणा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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