
देहरादून। वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट को पुलिस द्वारा घर से ले जाकर कई घंटों तक पूछताछ किए जाने के मामले ने अब प्रदेशभर के पत्रकारों और राजनीतिक हलकों में गंभीर बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम को लेकर मंगलवार को पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि बिना किसी स्पष्ट नोटिस या वारंट के सुबह तड़के पत्रकार हेम भट्ट को उनके घर से ले जाया गया, जिससे उनके परिवार, विशेषकर छोटे बच्चों पर मानसिक प्रभाव पड़ा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि पत्रकार के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, अन्यथा संबंधित अधिकारियों को इस कार्रवाई पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
मीडिया प्रतिनिधियों ने डीजी सूचना से आग्रह किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। पत्रकारों ने यह भी मांग उठाई कि जिस टीम ने हेम भट्ट के आवास पर कार्रवाई की, उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
इस दौरान सूचना महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों के हितों और सम्मान को लेकर सदैव संवेदनशील रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे।

वहीं इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रेस लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि किसी भी कार्रवाई के दौरान परिवार और बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बताया जा रहा है कि हेम भट्ट ने इस मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग और पुलिस शिकायत प्राधिकरण में भी शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई आरोप हैं तो उन्हें प्रमाण सहित सामने लाया जाए, अन्यथा उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकार संगठनों में नाराजगी का माहौल है और मामले की पारदर्शी जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

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