“जमीन बचाने नहीं, बेचने का कानून”: लूशुन टोडरिया का सरकार पर बड़ा आरोप

टिहरी के रामगांव में 79 नाली सामुदायिक भूमि की नीलामी ने मूल निवास कार्यकर्ता को किया बेचैन , बोले -प्रक्रिया में न तो मूल निवास का पैमाना, न ही स्थाई निवास की शर्त

टिहरी गढ़वाल। जिले के रामगांव क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि की नीलामी ने स्थानीय लोगों में रोष पैदा किया है। मूल निवास भू कानून प्रकोष्ठ के नेता लूशुन टोडरिया ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जमीन बचाने की बजाय बेचने का काम कर रही है।

टिहरी जनपद के बौर और रामगांव क्षेत्र की लगभग 1.572 हेक्टेयर (79 नाली) भूमि की नीलामी को लेकर विवाद गहरा गया है। स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों के अनुसार, यह भूमि वर्षों से उनके पशुओं के चारे और आजीविका का आधार रही है। अब इसे नीलाम करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिसके लिए 26 तारीख तक टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है।

सबसे विवादास्पद पहलू यह है कि नीलामी की शर्तों में कहीं भी यह अनिवार्य नहीं किया गया है कि बोलीदाता मूल निवासी या स्थायी निवासी होना चाहिए। लूशुन टोडरिया ने इस पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या यह नीलामी किसी भू माफिया को जमीन देने के लिए रखी गई है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब प्रशासन से इस बारे में बात की जाती है, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भूमि पर स्कूल और अस्पताल जैसी जनहित की सुविधाएं बनाई जा सकती थीं। विशेष रूप से जब टिहरी बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए भूमि की कमी बताई जाती है, तो सवाल उठता है कि इतनी बड़ी भूमि को नीलाम करने की क्या आवश्यकता है?

टोडरिया ने इस मामले में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की मौन स्वीकृति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि अपनी आंखों के सामने 79 नाली जमीन की नीलामी होते देख रहे हैं, तो उनकी चुप्पी चिंताजनक है।

यह मामला राज्य सरकार के भू कानून की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। टोडरिया ने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या वह “उत्तराखंड को बचाने का भू कानून” लाए थे या “उत्तराखंड को बेचने का” । उनका कहना है कि जब एक तरफ सख्त भू कानून की बात की जाती है, तो दूसरी तरफ इस तरह सार्वजनिक भूमि की नीलामी करना दोहरी नीति को दर्शाता है।

गौरतलब है कि लूशुन टोडरिया मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति के सक्रिय नेता हैं और हाल ही में उन्हें उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) की ओर से भूमि एवं डोमिसाइल सेल का प्रमुख भी नियुक्त किया गया है। इससे पहले भी वह सख्त भू कानून की मांग को लेकर राज्यभर में आंदोलन का नेतृत्व कर चुके हैं।

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