देहरादून/कोलकाता: भारत के प्रमुख स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क, मणिपाल हॉस्पिटल्स (ईएम बाइपास) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के विशेषज्ञों ने त्रिपुरा की एक 45 वर्षीय महिला, जो लिवर डोनर भी रह चुकी हैं, के जटिल ‘इन्सीजनल हर्निया’ का सफल इलाज आधुनिक की-होल (लैप्रोस्कोपिक) सर्जरी के जरिए किया है।
पेशे से शिक्षिका मरीज नूपुर सरकार की कहानी साहस से भरी है। तीन साल पहले उन्होंने अपने पति को लिवर का एक हिस्सा दान कर उनकी जान बचाई थी। हालांकि, इस बड़ी सर्जरी के बाद काम के बोझ और पर्याप्त आराम न मिलने के कारण उन्हें ‘इन्सीजनल हर्निया’ की समस्या हो गई। डर के कारण वे दोबारा बड़ी ओपन सर्जरी नहीं चाहती थीं, जिसके बाद वे विशेषज्ञ सलाह के लिए अगरतला से कोलकाता स्थित मणिपाल हॉस्पिटल पहुंचीं।
मणिपाल हॉस्पिटल ईएम बाइपास में जीआई सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. सुमंत डे के नेतृत्व में टीम ने मरीज की स्थिति का आकलन किया। डॉ. डे ने बताया, “चूंकि मरीज की पहले बड़ी सर्जरी हो चुकी थी, इसलिए यह मामला चुनौतीपूर्ण था। हमने ‘लैप्रोस्कोपिक एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन’ तकनीक का चुनाव किया। तीन घंटे चली इस सर्जरी में बिना कोई बड़ा चीरा लगाए पेट की दीवार का पुनर्निर्माण किया गया।”
उन्नत तकनीक का लाभ यह रहा कि मरीज सर्जरी के मात्र 4 घंटे बाद चलने लगीं और अगले ही दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नूपुर सरकार ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे दोबारा ओपन सर्जरी के नाम से डरी हुई थीं, लेकिन मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने न केवल उनका सफल इलाज किया बल्कि उन्हें मानसिक संबल भी दिया।
विशेषज्ञ की राय: डॉ. सुमंत डे के अनुसार, यह केस साबित करता है कि उन्नत लैप्रोस्कोपिक तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जो पहले बड़ी सर्जरी करा चुके हैं। इससे दर्द कम होता है और रिकवरी बेहद तेज होती है।

Recent Comments