बिना वैध प्रमाण-पत्र के खुद को ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ बता रहे कई मदरसे! बाल अधिकार आयोग की बड़ी बैठक में हुआ बड़ा खुलासा

मदरसों के छात्रावास, भोजन-शयन व्यवस्था की होगी नियमित जांच, POCSO अनुपालन पर बनेगी संयुक्त निगरानी व्यवस्था

देहरादून। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के विनियमन तथा विभागीय समन्वय को लेकर शुक्रवार को अल्पसंख्यक आयोग एवं शिक्षा विभाग के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में आयोग सदस्य दयाल सिंह, सदस्य बबीता सहौत्रा, सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल, अनुसचिव डॉ. सतीश कुमार सिंह, अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष बलजीत सिंह सोनी, शिक्षा विभाग के उपशिक्षा निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह नेगी तथा सुरजीत सिंह मौजूद रहे।

बैठक में राज्य में संचालित मदरसों एवं अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई तथा वर्तमान कानूनों के अनुरूप विभागीय समन्वय स्थापित करने पर चर्चा हुई। साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के पंजीकरण एवं नियामक तंत्र की समीक्षा करते हुए ऐसी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने पर बल दिया गया, जिससे किसी एक विभाग की कार्यवाही दूसरे विभाग के उद्देश्यों के विपरीत न हो।

बैठक में यह अहम बात सामने आई कि कई शिक्षण संस्थान खुद को अल्पसंख्यक संस्थान बताकर संचालित हो रहे हैं, जबकि उनके पास राज्य या केंद्र सरकार द्वारा जारी वैध अल्पसंख्यक दर्जे का प्रमाण-पत्र ही नहीं है। स्पष्ट किया गया कि बिना वैध प्रमाण-पत्र के कोई भी संस्थान स्वयं को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नहीं कह सकता, जबकि संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा-धर्म के अनुरूप शिक्षण संस्थान संचालित करने का अधिकार प्राप्त है। यह भी संज्ञान में आया कि कुछ कथित अल्पसंख्यक विद्यालयों में संबंधित समुदाय के विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम है। बैठक में स्पष्ट किया गया कि आईसीएसई, सीबीएसई एवं उत्तराखंड बोर्ड केवल संबद्धता प्रदान करते हैं, जबकि विद्यालयों की मान्यता देने का अधिकार शिक्षा विभाग के पास ही है।

सभी विद्यालयों द्वारा आयोग की SOP, ऑडिट प्रोफार्मा एवं दिशा-निर्देशों का अनिवार्य पालन सुनिश्चित करने के साथ ही वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, मातृभाषा व राष्ट्रगीत के अनुपालन तथा टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी प्रभावी ढंग से दिए जाने पर सहमति बनी। प्रवेश के समय हर विद्यार्थी के जन्म प्रमाण-पत्र का सत्यापन अनिवार्य किए जाने और छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के प्रवेश के मानकों का कड़ाई से पालन कराए जाने पर भी जोर दिया गया। पॉक्सो अधिनियम के प्रभावी अनुपालन हेतु संयुक्त निरीक्षण, निगरानी एवं विभागवार जिम्मेदारी तय करने का भी निर्णय लिया गया।

बैठक में मदरसों में संचालित छात्रावासों, भोजन व्यवस्था तथा शयन व्यवस्था के लिए तय मानकों का शिक्षा विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच सूचना आदान-प्रदान के लिए प्रभावी समन्वय तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी। सभी प्रतिभागियों ने राज्य में संचालित मदरसों व अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बाल अधिकारों की सुरक्षा तथा कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए आपसी समन्वय से कार्य करने पर सहमति व्यक्त की।

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