मारुति अर्टिगा की पिछली सीट पर उठे सुरक्षा के सवाल, परिवहन मंत्री को लिखा पत्र

सीट डिजाइन से यात्रियों को हो सकता है खतरा, विशेषज्ञ जांच की मांग

देहरादून। देश की सबसे लोकप्रिय कारों में शामिल मारुति सुजुकी अर्टिगा (Maruti Suzuki Ertiga) के 6+1 सीट वाले मॉडल की सबसे पिछली सीट की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। देहरादून के एक जागरूक नागरिक विजय वर्धन डंडरियाल द्वारा किए गए प्राथमिक निरीक्षण में पाया गया है कि इस सीट पर बैठने वाले यात्रियों को न केवल असुविधा का सामना करना पड़ता है, बल्कि अचानक ब्रेक लगने या दुर्घटना की स्थिति में उनके गंभीर रूप से घायल होने का जोखिम भी बना रहता है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देहरादून महानगर सिटी बस सेवा सोसाइटी के अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, उत्तराखंड के परिवहन आयुक्त और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) पुणे को पत्र लिखकर इस वाहन की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

क्या हैं सुरक्षा संबंधी चिंताएं?

श्री डंडरियाल ने अपने पत्र में बताया है कि अर्टिगा की तीसरी पंक्ति (पिछली सीट) की बनावट में कई खामियां नजर आती हैं:

  1. पर्याप्त हेडरूम नहीं: इस सीट पर बैठने वाले यात्रियों के सिर के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा में असहजता होती है और सिर छत से टकराने का खतरा बना रहता है।
  2. घुटनों के लिए स्थान की कमी: पिछली सीट आगे की सीटों के बेहद करीब है, जिससे बैठे यात्रियों के घुटनों के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। इस कारण वे सीधे नहीं बैठ पाते और सिकुड़कर यात्रा करने को मजबूर होते हैं।
  3. दुर्घटना में अधिक खतरा: अचानक ब्रेक लगने या पीछे से टक्कर होने की स्थिति में, सीट की निकटता और हेडरूम की कमी के कारण यात्रियों के सिर और घुटनों के गंभीर रूप से चोटिल होने की आशंका बनी रहती है।
  4. असुविधाजनक संरचना: सीट का डिजाइन लंबी दूरी की यात्रा के लिए उपयुक्त नहीं लगता, जिससे यात्रियों को शारीरिक परेशानी हो सकती है।

जागरूक डंडरियाल ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या यह सीट डिजाइन भारत सरकार द्वारा निर्धारित वाहन सुरक्षा मानकों (Automotive Industry Standards) को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि यदि यह वाहन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो यह न केवल निर्माता कंपनी की लापरवाही है, बल्कि इसे मंजूरी देने वाली एजेंसियों की भी जिम्मेदारी तय होगी।

विजय वर्धन डंडरियाल ने अपने पत्र में मांग की है कि:

· एआरएआई पुणे द्वारा इस वाहन की सीटिंग अरेंजमेंट और यात्री सुरक्षा मानकों के अनुपालन का तकनीकी परीक्षण किया जाए।
· केंद्रीय परिवहन मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार निर्माता कंपनी से तीसरी सीट के डिजाइन और सुरक्षा पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगे।
· यदि जांच में खामियां पाई जाती हैं, तो इस मॉडल के पंजीकरण और बिक्री पर रोक लगाने के साथ-साथ कंपनी द्वारा बेचे गए वाहनों में सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।

डंडरियाल ने कहा, “एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि हम संभावित खतरों की ओर ध्यान दिलाएं। आम जनता इस वाहन को परिवार के साथ यात्रा के लिए खरीदती है। ऐसे में पिछली सीट की यह स्थिति चिंताजनक है। हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेंगे और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।”

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